बिलासपुर ।ज़िला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण-शहर की ओर से लालबहादुर शास्त्री स्कूल प्रांगण में देश के दूसरे प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शास्त्री जी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ज़िला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री शारीरिक रूप से भले ही दुबले-पतले थे लेकिन उनके इरादे बेहद मजबूत थे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उस समय नेतृत्व किया, जब अधिकांश वरिष्ठ नेता गिरफ्तार हो चुके थे। शास्त्री जी सादगी, सरलता और सौम्यता के प्रतीक थे। उन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में कई ऐसे नियम लागू किए, जो आज भी प्रचलन में हैं।
उन्होंने कहा कि शास्त्री जी की स्पष्ट सोच थी कि देश की सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं और देश के भीतर किसानों के अन्न से राष्ट्र आर्थिक रूप से सशक्त बनता है। इसी विचार से उन्होंने जय जवान-जय किसान का नारा दिया जिससे सैनिकों और किसानों दोनों का मनोबल बढ़ा। उत्तर प्रदेश सरकार में रहते हुए उन्होंने महिलाओं की कंडक्टर के रूप में नियुक्ति की पहल की तथा भीड़ नियंत्रण के लिए लाठीचार्ज के स्थान पर पानी की बौछार की व्यवस्था शुरू करवाई।
कार्यक्रम के संयोजक ज़फर अली और हरीश तिवारी ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का प्रारंभिक जीवन संघर्ष और अभावों में बीता। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को एक कायस्थ परिवार में हुआ था। कुशाग्र बुद्धि के शास्त्री जी शिक्षा प्राप्त करने के लिए गंगा नदी तैरकर पार किया करते थे। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में भारत की विजय में उनका नेतृत्व निर्णायक रहा और लाहौर तक भारतीय सेना ने बढ़त बनाई। जनवरी 1966 में भारत-पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौता हुआ और उसी रात ताशकंद में शास्त्री जी का निधन हो गया।
इस अवसर पर महेंद्र गंगोत्री ज़फर अली हरीश तिवारी माधव ओत्तालवार त्रिभुवन कश्यप विनोद साहू सत्येंद्र तिवारी ब्रह्मदेव ठाकुर सुनील पांडेय अन्नपूर्णा ध्रुव शुभलक्ष्मी सिंह करम गोरख सुरेंद्र तिवारी गजेंद्र श्रीवास्तव शाहनवाज खान दीपक रायचेलवार गौरव एरी आनंद सिंह राजेश केसरी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
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