कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा बोलीं- युवा पीढ़ी गुप्त साहित्य का पुनर्पाठ करे, कालजयी रचनाएं आज भी देती हैं नई दिशा
CBN36 वर्धा। राष्ट्रकवि स्मृति समिति, वर्धा और विद्यार्थी साहित्य परिषद, महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, सेवाग्राम के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रकवि पद्मभूषण मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर आयोजित समारोह में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में था। उन्होंने कहा कि गुप्त की रचनाएं समाज को संकट से उबरने का मार्ग दिखाती हैं और युवा पीढ़ी को उनके समग्र साहित्य का पुनर्पाठ करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने खड़ी बोली को काव्य की प्रतिष्ठा दिलाई और वे भारतीयता, राष्ट्रीय चेतना तथा सांस्कृतिक मूल्यों के सशक्त स्वर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कस्तूरबा आरोग्य मंडल, सेवाग्राम के सचिव डॉ. बी.एस. गर्ग ने कहा कि गुप्त की कृति भारत-भारती ने देश में राष्ट्रीय जागरण की अलख जगाई और उनकी सरल भाषा ने साहित्य को जन-जन तक पहुंचाया।
समारोह में काव्य-संगीत संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने मैथिलीशरण गुप्त की रचनाओं की संगीतमय प्रस्तुति दी। बहुभाषीय काव्य एवं निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और सेवाग्राम संस्थान के अधिकारी, चिकित्सक, साहित्यकार, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
प्रधान संपादक



