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September 20, 2026 7:06 pm

दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन गूंजा सत्य का संदेश

जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, बच्चों ने किया तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन; ‘दान चिंतामणि’ नाटक ने मोहा मन

CBN36 बिलासपुर। पर्वाधिराज दसलक्षण महापर्व के पांचवें दिन रविवार को शहर के जैन मंदिरों में उत्तम सत्य धर्म की आराधना की गई। तीनों जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और शांतिधारा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। पूज्य 105 अकम्पमति माताजी एवं अचलमति माताजी के सानिध्य में हुए आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

प्रवचन में बताया गया कि सत्य केवल वाणी से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह आत्मा के वास्तविक और शुद्ध स्वरूप को पहचानने की भावना है। वस्तु का स्वरूप जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करना सत्य है। आत्मा की शरण ही सत्य की शरण है। परिस्थितियां विपरीत होने पर भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। सत्य को कभी पराजित नहीं किया जा सकता।

प्रवचन में कहा गया कि मनुष्य कई कारणों से असत्य बोलता है। क्रोध, लोभ, भय और हंसी-मजाक इसके प्रमुख कारण हैं। इनमें लोभ को असत्य का बड़ा कारण बताते हुए कहा गया कि स्वार्थ की पूर्ति के लिए व्यक्ति अक्सर असत्य का सहारा लेता है। इसलिए जीवन में सत्य, संयम और आत्मचिंतन को अपनाना आवश्यक है।

बच्चों ने किया तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन

दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर बच्चों ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया। इससे पहले अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। भव्य जैन, आरु जैन, इवान जैन, सर्वार्थ जैन, अतिक्ष जैन, विदित जैन, सोहनी जैन, जीविका जैन, आर्यिका जैन, ऊर्जा जैन, जानवी जैन, स्वस्ति जैन और अणिमा जैन ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया।

‘दान चिंतामणि’ ने दिया त्याग और नारी सशक्तिकरण का संदेश

दसलक्षण पर्व के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ रात्रि में महाआरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं। इसी क्रम में त्रिशला महिला मंडल, सन्मति विहार की ओर से ऐतिहासिक नाटक ‘दान चिंतामणि’ का मंचन किया गया।

परमपूज्य आर्यिका माताजी द्वारा लिखित इस नाटक में ‘कर्नाटक माता’ एवं ‘दान चिंतामणि’ के नाम से प्रसिद्ध सती अत्तिमब्बे के त्याग, तपस्या और दान की गाथा को प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने प्रभावी अभिनय से पात्रों को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने प्रस्तुति की सराहना की।

नाटक में अत्तिमब्बे की भूमिका डॉ. मीनल जैन, गुड्डुमब्बे की स्वप्निता जैन, सूत्रधार की डॉ. कमोद जैन, राजा चामुण्डराय की रोशिनी जैन, नागदेव की नम्रता जैन, महामंत्री मल्लप की अर्चना जैन, महाकवि पम्प की प्रिया जैन, रन्न की विदित जैन, नानी की अंगूरी जैन, दादाजी की सुमन जैन, मल्लप जी की मनाली जैन, माता की मालती जैन और सासू मां पद्मब्बे की अनुष्का जैन ने निभाई।

अन्य भूमिकाओं में देविष्ठा, निपुण, हर्ष, आशी जैन, स्वस्ति, प्रियल, अद्विक, प्रभात, मयंक, ओजस्विनी और ताशु ने अभिनय किया। नाटक का निर्देशन एवं संचालन डॉ. कमोद जैन ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों का सम्मान किया गया।

महिला मंडल ने बताया कि नाटक का उद्देश्य नई पीढ़ी को दान, त्याग और नारी सशक्तिकरण का संदेश देना है।

बाहर से आए श्रावक-श्राविकाओं के लिए भोजन व्यवस्था

दसलक्षण पर्व में शामिल होने के लिए बाहर से आए श्रावक-श्राविकाओं के लिए क्रांतिनगर जैन भवन में प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था समाज के संरक्षक श्रीमंत सेठ प्रवीण-शकुन जैन, श्रीमंत सेठ विनोद-रंजना जैन एवं सुकुमार-सरिता जैन परिवार की ओर से की गई है।

आयोजन में प्रवीण जैन, विनोद जैन, शकुन जैन, रंजना जैन, सुकुमार जैन, सनत जैन, दीपक जैन, जय कुमार जैन, कैलाश जैन, भूपेंद्र चंदेरिय, विशाल जैन, प्रकाश रंजनी वासल, राकेश जैन, सुनीता जैन, आशा जैन, मंगला जैन, प्रमोद जैन, रेखा जैन, अरुण जैन, दिनेश जैन, उषा जैन, सत्येंद्र जैन, निधि जैन, पदम जैन, ममता जैन, सुनील जैन, नमिता जैन, शैलेष जैन और शालिनी जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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