रायपुर, 21 जून। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सभी 33 जेलों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों बंदियों ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन और मानसिक संतुलन का संदेश दिया।
राजधानी रायपुर स्थित केंद्रीय जेल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नरेन्द्र मोदी की पहल से आज योग को वैश्विक पहचान मिली है और पूरा विश्व भारतीय योग परंपरा को अपना रहा है। उन्होंने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है तथा यह तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक है।
केंद्रीय जेल रायपुर में आयोजित विशेष योग शिविर में पुरुष प्रकोष्ठ के 500 तथा महिला प्रकोष्ठ की 150 बंदियों ने भाग लिया। योग सत्र में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक अनिल अग्रवाल एवं उनकी टीम ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान की तकनीकों का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को मानसिक तनाव, अवसाद और नकारात्मक विचारों से उबारकर उनमें आत्मविश्वास, आत्म-नियंत्रण, संयम तथा सकारात्मक सोच का विकास करना था। शिविर के दौरान ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, अनुलोम-विलोम, कपालभाति और ध्यान का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने योग के मानसिक एवं शारीरिक लाभों की भी जानकारी दी।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री सहित आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के प्रशिक्षक एवं जेल प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य की अन्य जेलों में भी योग दिवस के अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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