
दुर्ग, 15 जून। पुलिस लाइन स्थित सभागार में सोमवार को शौर्य चक्र से सम्मानित निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख का नागरिक अभिनंदन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दोनों अधिकारियों के साहस, वीरता और नक्सल विरोधी अभियानों में दिए गए उल्लेखनीय योगदान का सम्मान किया गया।

समारोह में पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर एवं ग्रामीण), नगर पुलिस अधीक्षक, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक और पुलिस परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस दौरान दोनों अधिकारियों को सम्मानित करते हुए उनके संघर्षपूर्ण एवं प्रेरणादायक सेवाकाल की सराहना की गई।

पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने कहा कि शौर्य चक्र जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत होना किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए गौरव की बात है। निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख ने विषम परिस्थितियों में कार्य करते हुए अदम्य साहस, धैर्य, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों अधिकारियों की उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस संगठन और दुर्ग जिले के लिए गर्व का विषय हैं।
40 मुठभेड़ों में निभाई सक्रिय भूमिका


मनेन्द्रगढ़ निवासी निरीक्षक लक्ष्मण केवट ने वर्ष 2007 में पुलिस सेवा आरंभ की थी। वर्तमान में वे कांकेर जिले के पखांजूर थाना प्रभारी हैं। नक्सल विरोधी अभियानों में उन्होंने 40 सफल मुठभेड़ों में सक्रिय भूमिका निभाई तथा विभिन्न अभियानों में 97 नक्सलियों के शव बरामद करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें एक शौर्य चक्र, छह पुलिस वीरता पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
25 सफल अभियानों में रहा योगदान

दुर्ग जिले के ग्राम झोला निवासी निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख वर्तमान में कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर थाना प्रभारी के रूप में पदस्थ हैं। उन्होंने वर्ष 2007 में पुलिस सेवा की शुरुआत की थी। नक्सल विरोधी अभियानों में 25 सफल मुठभेड़ों में सक्रिय सहभागिता निभाने के साथ विभिन्न अभियानों में 58 नक्सलियों के शव बरामद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी वीरता और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें शौर्य चक्र सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
क्या है शौर्य चक्र

शौर्य चक्र देश का शांति काल में प्रदान किया जाने वाला तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन सैन्य, अर्धसैनिक, पुलिस अधिकारियों एवं नागरिकों को दिया जाता है, जिन्होंने जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो।
समारोह के अंत में पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों और कर्मचारियों से जनता की सुरक्षा, कानून व्यवस्था तथा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया।
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