रायपुर, 12 जून। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग द्वारा प्रदेशभर में सड़क एवं यात्री सुरक्षा को लेकर विशेष जांच एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक करीब 350 वाहनों की सघन जांच की गई है। विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर वाहन स्वामियों से 5.50 लाख रुपये का समन शुल्क वसूला गया है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश ने सभी क्षेत्रीय एवं जिला परिवहन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित यात्री बसों, विशेषकर स्लीपर कोच बसों की कड़ाई से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
स्लीपर बसों पर विशेष निगरानी
विशेष अभियान के तहत स्लीपर कोच बसों में चालक दल के लिए बनाए गए अनधिकृत विभाजनों (पार्टीशन) तथा स्लीपर बर्थ में लगाए गए अवैध स्लाइडरों को मौके पर हटाया जा रहा है। साथ ही बसों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जांच की जा रही है।
अग्निशमन और जीपीएस व्यवस्था की जांच
विभाग द्वारा सभी बसों में न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। बसों में जीपीएस की उपलब्धता और उसकी कार्यशीलता की भी जांच की जा रही है। निर्धारित मानकों के विपरीत निर्मित बस बॉडी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दस्तावेजों का सत्यापन
अभियान के दौरान बसों के पंजीयन, फिटनेस, परमिट तथा एआईएस-119 मानकों के अनुरूप निर्माण संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
नियम उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
परिवहन आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। नियमों के उल्लंघन पर चालान, परमिट निलंबन तथा लाइसेंस संबंधी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
बस संचालकों को दी जा रही समझाइश
प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ परिवहन विभाग विभिन्न जिलों में बस स्वामियों एवं संचालकों की बैठकें भी आयोजित कर रहा है। इन बैठकों में उन्हें निर्धारित सुरक्षा मानकों एवं नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले किसी भी संचालक को बख्शा नहीं जाएगा।
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