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March 18, 2026 6:36 pm

हाई कोर्ट ने डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने जादू टोना के संदेह पर पिता एवं पुत्रों की सामूहिक पिटाई कर अर्धनग्न कर गांव में घूमाने व रात भर बंधक बनाकर रखे जाने के मामले में हाई कोर्ट ने डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 28 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।
अभनपुर थाना क्षेत्र में 13 मार्च 2025 को ग्रामीण काला जादू की बात कहते हुए तिलक साहू की पिटाई कर रहे थ्ो। तिलक साहू ने इस बात की जानकारी अपने पिता अमर सिंह साहू को दी, इस पर पिता अमर सिंह अपने बेटे नरेश साहू के साथ मौके में गया। इसके बाद ग्रामीणों ने तीनों की पिटाई कर बंधक बनाया व अर्धनग्न कर पूरे गांव में घूमाया व मुंह में खालिख लगा, जूते की माला पहना कर रात भर चौराहे में बंधक बनाकर रखा गया। दूसरे दिन सुबह डायल 112 को सूचना दी गई। इस पर पुलिस वाले मौके में पहुंच पीड़ित पक्ष से एक कागज में हस्ताक्षर लिया जिसमें यह लिखा था कि वे कोई शिकायत नहीं करेंगे। इसके बाद पुलिस ने तीनों को गांव के बाहर छोड़ दिया। पुलिस अधिकारियों के समक्ष हुए इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष की रिपोर्ट नहीं लिख्ो जाने पर उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दिया। न्यायालय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपितों के खिलाफ टोनही प्रताड़ना अधिनियम एवं अन्य धारा के तहत जुर्म दर्ज कर मामले में चालान पेश करने का आदेश दिया।
न्यायिक आदेश का पालन नहीं कर पुलिस ने 21 आरोपियों के खिलाफ जमानती धारा में अपराध पंजीबद्ध किया। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित ने हाई कोर्ट में याचिका पेश की। हाई कोर्ट ने मॉब लॉचिंग की घटना को नियंत्रित नहीं कर निष्पक्ष जांच नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने इस मामले में एसपी रायपुर, आईजी रायपुर एवं डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। एसएचओ एवं एसआई को दोषी माना गया पिछली सुनवाई में डीजीपी ने शपथ पत्र पेश कर कहा कि इस मामले में शिकायत और जांच को संभालने में पुलिस अधिकारियों की कथित गलतियों के बारे में कुछ चिताएं जताई गई। इसे देखते हुए, डिपार्टमेंटल लेवल पर मामले की जांच की गई और यह पता लगाने के लिए शुरुआती जांच का आदेश दिया गया कि क्या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई लापरवाही या ड्यूटी में कोताही हुई थी।

मामले में दोषी इंस्पेक्टर सिद्धेश्वर प्रताप सिह तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर, पुलिस स्टेशन अभनपुर और दो सब-इंस्पेक्टर नरसिह साहू, पुलिस स्टेशन अभनपुर के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है। उन्हें चार्जशीट दिया गया है। डीजीपी के जवाब चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र अग्रावल की डीबी ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता होगी कि वे अपनी समस्त शिकायतें विचारण न्यायालय के समक्ष उठाएं, और अपने इस तर्क के समर्थन में उचित सामग्री प्रस्तुत करें कि अभियुक्त व्यक्तियों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 309(6) और धारा 111(3), तथा छत्तीसगढ़ टोनाही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत अपराध बनते हैं। विचारण न्यायालय इस पर विचार करेगा और विधि के अनुसार उचित आदेश पारित करेगा। याचिकाकर्ता की शिकायत का इस न्यायालय द्बारा निपटारा किया गया।

कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले को लंबित रखा है कोर्ट ने याचिका में याचिकाकर्ताओं की शिकायत का निपटारा किया किन्तु दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चल रहे विभागीय कार्रवाई एवं भविष्य में इस घटना न हो इसे देखते हुए प्रकरण लंबित रखा है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि सार्वजनिक अपमान, भीड़ द्बारा हिसा, और पुलिस अधिकारियों की ओर से कथित चूकों से संबंधित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, यह न्यायालय इस मामले को संबंधित पुलिस अधिकारियों के आचरण के संबंध में लंबित रखना उचित समझता है। पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़, उपर्युक्त दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभ की गई विभागीय जांच के परिणाम को, एक नया शपथ-पत्र दाखिल करके, अभिलेख पर प्रस्तुत करेंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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