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April 27, 2026 12:46 am

प्राथमिक विद्यालय का रसोइया महेश शीर्ष माओवादी नेताओं के संपर्क में कैसे आया, आला अफसरों ने शुरू की पड़ताल

एनकाउंटर में मारा गया महेश कोडियम, इरपागुट्टा गांव के प्राथमिक विद्यालय में रसोई सहायक के रूप में काम कर रहा था

बीजापुर। बीजापुर जिले के नेशनल पार्क इलाके में सुरक्षा बलों व पुलिस की सर्चिंग के दौरान माओवादियों से मुठभेड़ हुआ था। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों व पुलिस ने सात माओवादियों को मौत के घाट उतार दिया था। शव की बरामदी में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एनकाउंटर में मारा गया महेश कोडियम, इरपागुट्टा गांव के प्राथमिक विद्यालय में रसोई सहायक के रूप में काम कर रहा था। आला अफसरों ने इस बात की जांच शुरू कर दी है कि आखिरकार एक रसोइया शीर्ष माओवादी नेताओं के संपर्क में कैसे आया। किसने महेश को माओवादी नेताओं से मिलवाया।

बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में जून 2025 के पहले पखवाड़े के दौरान सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए सघन माओवादी विरोधी अभियानों की श्रृंखला में, माओवादी कैडर और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ों के पश्चात् सात माओवादियों के शव बरामद किए गए। बरामद शवों में दो शीर्ष माओवादी नेताओं गौतम उर्फ सुधाकर ,भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य एवं भास्कर राव , भाकपा ( माओवादी ) स्टेट कमिटी सदस्य शामिल हैं ।
बरामद अन्य शवों में से एक की पहचान महेश कोडियम के रूप में की गई, जो बीजापुर जिले के फरसगढ़ थाना अंतर्गत इरपागुट्टा गांव का निवासी था। मृत महेश कोडियम के शव का पंचनामा किए जाने के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वह नेशनल पार्क क्षेत्र डिवीजन के अंतर्गत प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन का पार्टी सदस्य था और उसकी संलिप्तता इस अवैध संगठन से थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि महेश कोडियम इरपागुट्टा गांव के प्राथमिक विद्यालय में रसोई सहायक के रूप में कार्यरत था। उसका चयन गांव की विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा किया गया था और मार्च 2025 तक उसे भुगतान किया जा रहा था। महेश कोडियम किन परिस्थितियों में केंद्रीय समिति सदस्य गौतम, राज्य समिति सदस्य भास्कर जैसे शीर्ष माओवादी नेताओं के संपर्क में आया। इस पूरे मामले की हर पहलू से गंभीर, निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से जांच की जा रही है।
पुलिस एक बार पुनः माओवादी संगठन से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े सभी व्यक्तियों से अपील करता है कि वे इस प्रतिबंधित और अवैध संगठन से तत्काल संबंधविच्छेद करें। माओवादी संगठन से जुड़ाव न केवल समाज और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि स्वयं संबंधित व्यक्ति के जीवन और भविष्य के लिए भी घातक सिद्ध हो सकता है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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