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March 7, 2026 6:01 pm

हाई कोर्ट ने राजस्व मंडल के फैसले को सही ठहराया

बिलासपुर। गांव में कोटवार के पद पर नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। रिट याचिका की सुनवाई क बाद जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने कहा, कोटवार के पद पर नियुक्ति के लिए पूर्व कोटवार के निकट संबंधी को वरीयता देना अनिवार्य नहीं है। जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा है, छत्तीसगढ़ भूमि राजस्व संहिता, 1959 की धारा 230 के अंतर्गत कोटवार के पद पर नियुक्ति वैधानिक नियमों द्वारा ही नियंत्रित होती है। नियम 4(2) के अंतर्गत पूर्व कोटवार के निकट संबंधी को वरीयता देना विवेकाधीन है और इससे कोई निहित अधिकार उत्पन्न नहीं होता। राजस्व अधिकारियों के निर्णय में किसी प्रकार की विकृति या अवैधता न होने की स्थिति में अनुच्छेद 226 के अंतर्गत हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।

याचिकाकर्ता परदेशी राम ने छत्तीसगढ़ राजस्व बोर्ड, बिलासपुर, रायपुर सर्किट कोर्ट द्वारा 23 जून 2023 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। राजस्व बोर्ड ने माना कि याचिकाकर्ता सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1959 के नियम 1 और 2 के साथ पढ़े जाने वाले धारा 51 के तहत रिकॉर्ड में स्पष्ट त्रुटि को इंगित करने में विफल रहा है। यह भी माना, रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जो राजस्व बोर्ड द्वारा 16 जुलाई 2021 को पारित पूर्ववर्ती आदेश की पुनरीक्षण को उचित ठहराता हो। याचिकाकर्ता राजस्व बोर्ड द्वारा पारित आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता परदेशी राम के पिता, खेलन दास पनीका, ग्राम गनियारी के कोटवार के पद पर कार्यरत थे। 06 नवंबर .2010 को निधन हो गया। उनके निधन के बाद, रिक्त पद को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। ग्राम पंचायत ने याचिकाकर्ता की सिफारिश की। इसके बावजूद, तहसीलदार ने लक्ष्मण सिंह को कोटवार नियुक्त किया। याचिकाकर्ता ने इस नियुक्ति को चुनौती दी, लेकिन मामले की सुनवाई से पहले ही लक्ष्मण सिंह का निधन हो गया और मामला खारिज कर दिया गया।

तहसीलदार ने नियुक्ति के लिए एक नई घोषणा जारी की। याचिकाकर्ता और रामबिहारी साहू, दोनों ने आवेदन किया। रामबिहारी को कोटवार के पद पर नियुक्त किया गया। जिसे एसडीएम के समक्ष चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद एसडीएम ने पाया कि नियम 4(1) और (2) तथा धारा 230 सीआरपीसी के तहत उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था, जिसमें ग्राम पंचायत की सिफारिश और पुलिस से चरित्र प्रमाण पत्र का अभाव भी शामिल था, और मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया। रामबिहारी ने आयुक्त के समक्ष अपील पेश की। सुनवाई के बाद आयुक्त ने रामबिहारी की अपील स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता परदेशी राम ने आयुक्त के आदेश को चुनौती देते हुए राजस्व मंडल के समक्ष अपील पेश की। मामले की सुनवाई के बाद राजस्व मंडल ने याचिकाकर्ता के पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए रामबिहारी को स्थायी कोटवार के पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया।
जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा है, याचिकाकर्ता किसी भी लागू वैधानिक अधिकार के उल्लंघन या संहिता, 1959 की धारा 230 या उसके अंतर्गत निर्मित नियमों में निहित किसी भी अनिवार्य प्रावधान के उल्लंघन को सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा है। कार्यवाही के किसी भी चरण में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं दिखाया गया है। याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के साथ-साथ अपीलीय, पुनरीक्षण और समीक्षा मंचों के समक्ष उचित अवसर प्रदान किया गया था। याचिकाकर्ता का यह तर्क कि मृतक कोटवार का पुत्र होने के नाते उसे नियुक्ति का श्रेष्ठ अधिकार है, विधिवत रूप से गलत है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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