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October 15, 2026 2:02 pm

डीएलएड अभ्यर्थी ने हाई कोर्ट में दायर किया केविएट

प्राइमरी स्कूलों में डीएलएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति की शासन स्तर पर जारी प्रक्रिया के बीच डीएलएड अभ्यर्थी व मुख्य प्रकरण के याचिकाकर्ता विकास कौशिक ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में केविएट दायर किया है। केविएट दायर के पीछे बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों द्वारा हाई काेर्ट में याचिका दायर करने और किसी तरह का फैसला देने से पहले उनका पक्ष सुने जाने की मांग की है।

बिलासपुर। बीएड डीएलएड विवाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट के फैसले और कड़े निर्देश के बाद राज्य शासन ने प्राइमरी स्कूलों में पदस्थ बीएड डिग्रीधारकों की सेवा समाप्ति का आदेश निकालना जारी कर दिया है। बस्तर और सरगुजा संभाग के डीईओ द्वारा आदेश निकालना प्रारंभ कर दिया गया है। इस बीच डीएलएड अभ्यर्थी व पूर्व में दायर याचिका के मुख्य याचिकाकर्ता विकास कौशिक ने अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में केविएट दायर कर दिया है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बीएड डिग्रीधारक सहायक शिक्षकों को प्राइमरी स्कूल के लिए अपात्र मानते हुए डीएलएड डिप्लोमाधारक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक के पद पर पात्र माना है और प्राइमरी स्कूलों में बतौर सहायक शिक्षक नियुक्ति देने का निर्देश राज्य शासन को दिया है। डीएलएड योग्यता वाले अभ्यर्थी को सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु संशोधित चयन सूची बना कर 6 सप्ताह में नियुक्ति देने के निर्देश 2. 4.2024 को दिया गया था।


0 बीएड डिग्रीधारकों को सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए बीएड डिग्रीधारी सहायक शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और निर्देश के बाद भी राज्य शासन द्वारा जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तब डीएलएड डिप्लोमाधारकों ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना के आरोप में अवमानना याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर आदेश का परिपालन करने का निर्देश दिया था।
0 अब शुरू हुई प्रक्रिया, दावा आपत्ति के मिला सात दिन का समय
बीएड डिग्रीधारी सहायक शिक्षकों को डीईओ कार्यालय से बर्खास्तगी आदेश जारी करने के साथ ही दावा आपत्ति के लिए सात दिन का समय दिया गया है। याचिकाकर्ता ने इन्हीं सब बातों का हवाला देते हुए केविएट दायर किया है। केविएटर का कहना है कि बीएड डिग्रीधारकों द्वारा डीईओ के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की जाती है तो ऐसी स्थिति में किसी प्रकार का अंतरिम आदेश जारी करने से पहले उनका पक्ष सुनने की मांग की है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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