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June 14, 2026 12:18 am

मुख्यमंत्री के निर्देश, राज्यपाल का संज्ञान और खनिज विभाग के दावे भी बेअसर: अंकित गौराहा

बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कछार, सेंदरी और लोफंदी में कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम कछार निवासी सावन खांडे ने कलेक्टर बिलासपुर को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि के समीप अरपा नदी से लगातार रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई, जिसकी एफआईआर कोनी थाना में दर्ज है। इसके बावजूद खनन गतिविधियां नहीं रुकी हैं और उनकी भूमि को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

कई स्तरों पर की गई शिकायत, कार्रवाई का इंतजार

प्रार्थी के अनुसार मामले की शिकायत केवल एक बार नहीं, बल्कि कई स्तरों पर की जा चुकी है। कोनी थाना में रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ-साथ जिला प्रशासन, कलेक्टर कार्यालय और मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार कार्यक्रम में भी शिकायत प्रस्तुत की गई। बावजूद इसके अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

निर्देश और दावे धरातल पर क्यों नहीं दिख रहे?

प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अवैध खनन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। वहीं राज्यपाल ने भी प्रदेश में अवैध खनन के मामलों पर संज्ञान लिया था। खनिज विभाग के अधिकारियों द्वारा ड्रोन के माध्यम से निगरानी कर अवैध खनन पर नियंत्रण की बात भी कही गई थी। इसके बावजूद ग्राम कछार में जारी गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन निर्देशों और दावों का जमीनी स्तर पर कितना असर हुआ है।

स्थानीय विधायक की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

क्षेत्रवासियों का कहना है कि किसानों की भूमि, पर्यावरण और नदी तटों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। लोगों के बीच यह चर्चा है कि इस गंभीर मुद्दे पर क्षेत्रीय विधायक द्वारा अब तक क्या पहल की गई है।

प्रशासनिक तंत्र की विफलता का आरोप

मामले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौराहा ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक किसान को कोनी थाना, कलेक्टर कार्यालय और सुशासन तिहार तक शिकायत करनी पड़े और उसके बाद भी कार्रवाई न हो, तो यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “शासन के सर्वोच्च स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदल रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रदेश सरकार अवैध खनन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन ग्राम कछार की स्थिति उन दावों की वास्तविकता उजागर कर रही है। यदि शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो जनता का विश्वास व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।”

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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