CBN36 बिलासपुर। दसलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को जैन समाज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के साथ पर्व का समापन किया। इस अवसर पर तीनों जिनालयों में धार्मिक अनुष्ठान हुए। श्री वासुपूज्य भगवान के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सरकंडा से भगवान की विमान यात्रा निकाली गई, जिसमें पुरुष श्रद्धालु श्वेत धोती-दुपट्टा धारण कर शामिल हुए।
ब्रह्मचर्य आत्मबल और संयम का आधार

पर्व के दसवें और अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। संयम जैन, अनिल जैन, निपुण जैन, अनमोल जैन, आकृत जैन, सम्यक जैन, ओम जैन, विशिष्ट जैन, वरुण जैन, संभव जैन और सुनील जैन ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया। इसके पूर्व श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की।
प्रवचन में ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा गया कि इंद्रिय संयम से आत्मबल और आत्मबल से ब्रह्मचर्य की साधना मजबूत होती है। ब्रह्मचर्य केवल बाहरी आचरण नहीं, बल्कि जाग्रत चेतना की आंतरिक अवस्था है। व्यक्ति संसार के विषयों, इच्छाओं और आकर्षणों में भटकता रहता है, लेकिन जब वह भीतर की ओर देखता है तो उसे आत्मस्वरूप का बोध होता है।
प्रवचन में संसार के स्वरूप और इंद्रिय विषयों में आसक्ति से होने वाले दुख को भी समझाया गया। कहा गया कि दृष्टि बदलने से सृष्टि बदल जाती है। जिसे व्यक्ति अपना मानकर आसक्त होता है, वही मोह आगे चलकर दुख का कारण बनता है। देव भी मनुष्य जीवन प्राप्त कर संयम ग्रहण करने की आकांक्षा रखते हैं, क्योंकि आत्मकल्याण और मोक्ष के मार्ग में संयम का विशेष महत्व है।
धर्म का समापन नहीं, आत्मआराधना की शुरुआत

प्रवचन में कहा गया कि दसलक्षण महापर्व का अंतिम दिन धर्म का अंत नहीं, बल्कि धर्म को समझकर उसे जीवन में उतारने की शुरुआत है। आत्मा की आराधना और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति को अपने भीतर की चेतना को जाग्रत करने का प्रयास करना चाहिए। वासुपूज्य भगवान के मोक्षगमन की स्मृति में निर्वाण लाडू अर्पित कर श्रद्धालुओं ने भक्ति और आराधना की।
शुक्रवार दोपहर क्रांतिनगर स्थित 1008 श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर और सन्मति विहार स्थित 1008 पंचबालायती दिगंबर जैन मंदिर में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर श्रीमंत सेठ प्रवीण जैन, शकुन जैन, श्रीमंत सेठ विनोद जैन, रंजना जैन, सुकुमार जैन, सरिता जैन, डॉ. पीसी वासल, रंजनी वासल, राकेश जैन, सुनीता जैन, सनत जैन, आशा जैन, कैलाश जैन, मंगला जैन, प्रमोद जैन, रेखा जैन, अरुण जैन, दिनेश जैन, ऊषा जैन, सत्येंद्र जैन, निधि जैन, पद्म जैन, ममता जैन, सुनील जैन, नमिता जैन, शैलेश जैन, शालिनी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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