फिल्मी अंदाज में तस्करी, वो भी खुलेआम!
गांजा तस्करों के लिए जशपुर से लेकर सरगुजा तक का पूरा इलाका किसी स्वर्ग से कम नहीं रह गया है। तस्करों ने इस पूरे क्षेत्र को रेड जोन में तब्दील कर दिया है। रेड जोन की बात छोड़िए, अब तो दिनदहाड़े हो या रात का अंधेरा, चमचमाती गाड़ियों में खुलेआम तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है। कांकेर और केशकाल घाटी के बीच जो कुछ हुआ, वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। तस्करों और पुलिस के बीच लुकाछिपी का ऐसा खेल चला कि एक भयावह हादसा होते-होते बचा। जांबाज अफसर बाल-बाल बच गए। अफसरों से लेकर मातहतों तक की बहादुरी की दाद देनी होगी, जिन्होंने आखिरी दम तक मोर्चा संभाले रखा। आखिरकार तस्करों को गांजे से भरी गाड़ी छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा।
मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड, बढ़ने लगी धड़कनें
मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड दिल्ली पहुंच चुकी है। दीपावली से ठीक पहले सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट कार्ड की खबर ने मंत्रियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। न रात में नींद आ रही है और न दिन में चैन। मंत्रियों से ज्यादा बेचैनी तो उन छुटभैयों में है, जो भैयाजी लोगों की आड़ में अपनी दुकान चला रहे हैं। अब उन्हें चिंता सताने लगी है कि अगर भैया की कुर्सी खिसक गई तो उनका क्या होगा? उनकी सजी-सजाई शोरूमनुमा दुकान का क्या होगा? अभी तक जिनके दरबार में पूछपरख थी, वे एक झटके में किनारा कर सकते हैं। ऐसे में दीपावली की रौनक भी कुछ फीकी पड़ती नजर आ रही है।
स्मृति आईं, चली गईं और अब सियासी धमाका!
भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी आईं। करीब डेढ़ दिन प्रदेश में रहीं, नेताओं से मुलाकात की, फीडबैक लिया और फिर लौट गईं। लेकिन उनके दौरे के बाद दिल्ली से जो सियासी धमाके की खबरें आई हैं, उनकी गूंज मंत्रियों से लेकर सिपहसालारों और खासमखास लोगों तक पहुंच चुकी है। इस धमाके ने कई लोगों के कान खड़े कर दिए हैं। अब भविष्य की चिंता सताने लगी है। सुबह से देर रात तक सियासी गलियारों में एक ही सवाल तैर रहा है-कहीं कुर्सी खिसक गई तो आगे क्या होगा?
एक और अग्निपरीक्षा का दौर
छत्तीसगढ़ में एक और चुनावी जंग की तैयारी शुरू हो गई है। त्योहार के बाद प्रदेश के जिन 10 नगरीय निकायों में चुनाव होने हैं, वहां अभी से चुनावी रंग चढ़ने लगा है। टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों के इर्द-गिर्द इन दिनों वोटरों की आवाजाही बढ़ गई है। हालांकि, यह भीड़ दावेदारों की लोकप्रियता का पैमाना नहीं है। दरअसल, वोटर भी अपनी-अपनी जुगाड़ में जुट गए हैं और संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं। उनके लिए दीपावली का त्योहार डबल धमाके से कम नहीं है। वोटरों की इस उम्मीद और दावेदारों की बढ़ती सक्रियता के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के रणनीतिकारों के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाला।
अटकलबाजी
सवाल नंबर एक
मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड की खबरें लीक होने के बाद सबसे ज्यादा बेचैनी आखिर किस बंगले में है? और किस मोहल्ले में इन दिनों सियासी गणित तेजी से लगाया जा रहा है? कुर्सी की चिंता सिर्फ मंत्रियों को है या उनके दरबारियों को भी?
सवाल नंबर दो
दिल्ली की रैली से लौटे स्थानीय कांग्रेसी दिग्गजों में इन दिनों फोटो पोस्ट करने की होड़ लगी है। सोशल मीडिया पर हर कोई अपनी मौजूदगी का सबूत पेश कर रहा है। कोई मंच पर नजर आ रहा है तो कोई बड़े नेताओं के साथ। अब सवाल यह है कि रैली में भीड़ जुटाने गए थे या लौटकर फोटो के जरिए अपना सियासी कद बढ़ाने?
प्रधान संपादक