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September 25, 2026 8:48 pm

भारतीय दार्शनिक परंपराएं एकात्म भाव पर आधारित : पद्मश्री गिरीश प्रभुणे

दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर एकात्म मानववाद, अंत्योदय और राष्ट्र निर्माण विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

CBN36 वर्धा, 25 सितंबर। भारतीय दर्शन की विभिन्न परंपराएं मूल रूप से एकात्म भाव पर आधारित रही हैं। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की अवधारणा संपूर्ण मानव समाज को एक परिवार के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान करती है। यह बात वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी पद्मश्री गिरीश प्रभुणे ने शुक्रवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के गालिब सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।

विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग की ओर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को अंत्योदय दिवस के रूप में मनाते हुए ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानववाद, अंत्योदय और राष्ट्र निर्माण’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि पद्मश्री गिरीश प्रभुणे ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े कई प्रसंग भी साझा किए।

विशेष अतिथि प्रो. सुभाष लोहे ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन में धर्म भारत की आत्मा है और मनुष्य प्रकृति से अलग नहीं है। भारत का दर्शन एकात्म दर्शन है, जिसमें मनुष्य, प्रकृति और समाज को परस्पर जुड़ा हुआ माना गया है। उन्होंने कहा कि भारत में भूमि को माता के रूप में देखा और उसका वंदन किया जाता है। इसी भाव के कारण राष्ट्र के प्रति जुड़ाव और देशभाव स्थायी रूप से विकसित हुआ है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि एकात्म मानववाद अंतिम मनुष्य और मनुष्यता की स्थापना करता है तथा अंत्योदय मनुष्य को गरिमापूर्ण जीवन देने का अवसर प्रदान करता है। यही भावना संविधान में भी निहित है।

जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने कार्यक्रम का प्रास्ताविक वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं संयोजक डॉ. राजेश लेहकपुरे ने किया। धन्यवाद ज्ञापन जनसंचार विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेणु सिंह ने किया।

इस अवसर पर जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों के प्रायोगिक समाचार पत्र ‘मीडिया समय’ के नए अंक का विमोचन किया गया। साथ ही प्रायोगिक टीवी न्यूज बुलेटिन ‘वर्धा दर्शन’ का प्रसारण भी किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रो. अवधेश कुमार, प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, डॉ. एच.ए. हुनगुंद, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. शैलेश मरजी कदम, डॉ. सूर्य प्रकाश पांडेय, डॉ. बालाजी चिरडे, डॉ. अशोकनाथ त्रिपाठी, डॉ. रूपेश कुमार, डॉ. श्रीनिकेत कुमार मिश्र, डॉ. शिव सिंह बघेल, डॉ. कोमलकुमार परदेशी, डॉ. जगदीश नारायण तिवारी, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. संदीप कुमार वर्मा और डॉ. गीता शाहू सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

प्रयागराज एवं रिद्धपुर केंद्र के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शोधार्थी, विद्यार्थी तथा साहित्य और सामाजिक चिंतन से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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