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September 23, 2026 6:25 pm

धान के रकबे की अब सैटेलाइट से होगी सटीक जांच

डिजिटल क्रॉप सर्वे और जीआईएस मैपिंग से पारदर्शी होगी धान खरीदी व्यवस्था

CBN36 रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान की खेती के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन अब सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। इस संबंध में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के बीच बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ। इस पहल से धान उपार्जन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

एमओयू के तहत उन कृषि क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जो अभी तक डिजिटल रूप से मैप नहीं किए गए हैं। इनमें विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत आबंटित भूमि और डुबान क्षेत्रों में स्थित कृषि भूमि शामिल है। इन क्षेत्रों की जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी। इससे डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए आवश्यक आधारभूत डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

सैटेलाइट इमेजरी से होगी फसल की पुष्टि

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की जाने वाली पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर धान के वास्तविक रकबे का आकलन किया जाएगा। जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश और देशांतर का सैटेलाइट इमेजरी से मिलान किया जाएगा। इसके माध्यम से यह पुष्टि की जाएगी कि संबंधित भूमि पर धान की फसल बोई गई है या नहीं।

दूरदराज के क्षेत्रों की भी होगी डिजिटल पहचान

इस तकनीकी सत्यापन से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों, विशेषकर एफआरए और डुबान क्षेत्रों की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी। इससे धान के रकबे के आकलन में अधिक सटीकता आएगी और डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए मजबूत आधार तैयार होगा। साथ ही, धान उपार्जन की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी भी बेहतर होगी।

एमओयू के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संचालक कवीश्वर उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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