(जगत प्रकाश नड्डा लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री हैं)
छत्तीसगढ़।वैश्विक स्तर पर औषधि उद्योग में तेजी से बदलाव हो रहा है। कुल औषधि राजस्व में बायोलॉजिक, बायोसिमिलर और विशेष दवाओं की हिस्सेदारी अब 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। लंबे समय तक जेनरिक दवाओं में अग्रणी रहने के कारण ‘विश्व की फ़ार्मेसी’ के रूप में पहचान बना चुके भारत के लिए अब समय है कि वह पैमाने से आगे बढ़कर नवाचार की दिशा में निर्णायक कदम उठाए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार इस परिवर्तन को गति देने के लिए भविष्य उन्मुख नीतिगत ढांचा तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य जेनरिक दवाओं में देश की मजबूत स्थिति को बनाए रखते हुए उभरते बायोफार्मा और उच्च-मूल्य चिकित्सा क्षेत्रों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹10,000 करोड़ के मिशन बायोफार्मा निर्माण शक्ति की घोषणा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह मिशन अगले 8 से 10 वर्षों में भारत को बायोफार्मा नवाचार और उच्च मूल्य चिकित्सा सेवाओं का वैश्विक केंद्र बनाने के संकल्प को दर्शाता है। इसका फोकस वैज्ञानिक क्षमताओं के विकास, नवाचार-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने और अगली पीढ़ी की दवाओं के क्षेत्र में भारत को अग्रणी बनाने पर है।
इस कार्यक्रम के तहत बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और उन्नत चिकित्सा क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ किया जाएगा। यह औषधि विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग की मौजूदा पहलों जैसे पीआरआईपी, अनुसंधान-विकास एवं नवाचार योजनाएं और बायोनेस्ट का पूरक होगा। इन पहलों का उद्देश्य जीवन विज्ञान क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना और जेनरिक दवाओं से नवाचार आधारित दवा विकास की ओर संक्रमण को संभव बनाना है।
रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ किण्वन आधारित निर्माण क्षमताओं का विकास है। एंटीबायोटिक, वैक्सीन, एंज़ाइम और बायोलॉजिक्स के उत्पादन में इसकी अहम भूमिका के बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय से आयात पर निर्भर रहा है। अब अवसंरचना निवेश, तकनीकी विकास और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके साथ ही, भारत के नैदानिक अनुसंधान तंत्र को भी सशक्त किया जा रहा है। देश में 1,000 मान्यता प्राप्त नैदानिक परीक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना है, जिससे भारत वैश्विक दवा विकास का प्रमुख गंतव्य बन सकेगा। कम लागत और कुशल मानव संसाधन के कारण भारत उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए उपयुक्त मंच प्रदान करता है। नियामक ढांचे को सुदृढ़ करने और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल एवं त्वरित बनाने से वैश्विक स्तर पर भरोसा भी बढ़ेगा।
पिछले वर्षों में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन PLI और बल्क ड्रग पार्क योजनाओं के माध्यम से सक्रिय औषधि सामग्री एपीआई और प्रमुख कच्चे पदार्थों केएसएम के घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे दवाओं की लागत में कमी आई है और स्वास्थ्य सेवाएं आम नागरिकों के लिए अधिक किफायती बनी हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत 19,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ ही कैंसर और दुर्लभ रोगों की दवाओं पर सीमा शुल्क में रियायत जैसे कदम जीवनरक्षक उपचारों को अधिक सुलभ बना रहे हैं। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि उन्नत चिकित्सा सेवाएं भी आम नागरिक की पहुंच में रहें।
जैसे-जैसे औषधि उद्योग विकसित हो रहा है, भारत का लक्ष्य केवल पारंपरिक बाजारों तक सीमित न रहकर नवाचार-आधारित क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है। इसके लिए नियामक सुधार, प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण और तेज अनुमोदन प्रणाली जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे कारोबार सुगमता बढ़े और गुणवत्ता मानकों में निरंतर सुधार हो।
हालांकि, अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना अभी भी एक चुनौती है। इसके समाधान के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना आवश्यक होगा, ताकि दीर्घकालिक नवाचार को निरंतर बनाए रखा जा सके।
भारत का औषधि बाजार, जिसका वर्तमान मूल्य 4 लाख करोड़ से अधिक है, आने वाले वर्षों में और विस्तार के लिए तैयार है। अगले दशक में भारत न केवल जेनरिक दवाओं में अग्रणी रहेगा, बल्कि नवोन्मेषी दवाओं, किण्वन-आधारित उत्पादों और उन्नत चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में भी वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा।
भारत का औषधि क्षेत्र अब एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां नवाचार, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रमुख आधार होंगे। मिशन बायोफार्मा निर्माण शक्ति, नैदानिक अवसंरचना विस्तार और लक्षित नीतिगत प्रोत्साहनों के माध्यम से भारत मात्रा-आधारित जेनरिक उत्पादन से आगे बढ़कर उच्च-मूल्य बायोफार्मा नवाचार का वैश्विक नेतृत्व करने की दिशा में अग्रसर है। यह परिवर्तन ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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