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February 5, 2026 8:32 pm

वक्ताओं ने कहा डिजिटल युग में एआई साक्षर होना समय की आवश्यकता

वर्धा, 05 फरवरी 2026।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में भाषा प्रौद्योगिकी एवं भाषा अभियांत्रिकी विभाग भाषा विद्यापीठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय एआई प्रि-समिट 2026 के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धि शिक्षा समाज एवं नवाचार विषय पर प्री-समिट राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन गुरुवार को कस्तूरबा सभागार में हुआ। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि आज के डिजिटल युग में एआई साक्षर होना समय की आवश्यकता है। एआई जहां एक ओर चुनौतियां प्रस्तुत करता है, वहीं दूसरी ओर यह रोजगार और नवाचार के नए अवसर भी सृजित कर रहा है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता एवं संगोष्ठी निदेशक प्रो. प्रीति सागर ने की। इस अवसर पर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान नागपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ. वसुधंरा राठोड़ ने कृत्रिम बुद्धि को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि व्यक्ति दिन की शुरुआत से लेकर सोने तक किसी न किसी रूप में एआई का उपयोग करता है। एआई मानव के कार्यों को सरल बनाता है, परंतु मानव बुद्धि का स्थान नहीं ले सकता। उन्होंने विभिन्न एआई मॉडलों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।

प्रिंसिपल साइंटिफिक ऑफिसर पीएसओ एमगिरी वर्धा के डॉ. श्रवण चांडक ने एआई की संभावनाओं और चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कम लागत पर प्रभावी समाधान उपलब्ध करा सकता है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि शीतगृह जैसी तकनीकों से कृषि उत्पादों के नुकसान को कम कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।

चीफ एआई साइंटिस्ट एजेंथिक्स प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरु के डॉ. अर्पित यादव ने ऑनलाइन संबोधन में जनरेटिव एआई के माध्यम से उद्योग और समाज में हो रहे परिवर्तनों पर अपने विचार रखे। वहीं आईआईआईटी नागपुर के एसोसिएट डीन अकादमिक डॉ. तौसीफ दीवान ने मल्टी-मॉडल डेटा जीरो-शॉट लर्निंग और प्रॉम्प्ट तकनीक की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।

अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. प्रीति सागर ने कहा कि एआई भले ही वर्तमान पीढ़ी के लिए चुनौती है, लेकिन इसका सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सामना करना आवश्यक है। एआई मानव से ऊपर नहीं हो सकता, बल्कि यह मानव के लिए सहायक उपकरण है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं कुलगीत से हुआ। अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय के प्रतीक चिह्न भेंट कर किया गया। संगोष्ठी का संचालन विभाग की प्रभारी एवं संयोजक डॉ. हर्षलता पेटकर ने किया जबकि संगोष्ठी समन्वयक डॉ. अंजनी कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी डॉ. बालाजी चिरडे डॉ. रविंद्र बोरकर डॉ. एच.ए. हुनगुंद डॉ. अमरेंद्र कुमार शर्मा डॉ. दिव्या शुक्ला सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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