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January 11, 2026 7:34 am

पटवारी के विरुद्ध विभागीय जांच के निर्देश पर हाई कोर्ट की रोक

बिलासपुर. रायगढ़ जिले के अंतर्गत तहसील पुसौर में पदस्थ रहे पटवारी सच्चिदानंद साहू के विरुद्ध छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, बिलासपुर द्वारा जारी विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश पर हाई कोर्ट ने रोक लगाते हुए राज्य शासन, सचिव बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, आयुक्त राजस्व बिलासपुर संभाग, कलेक्टर रायगढ़, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व रायगढ़ एवं तहसीलदार पुसौर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

रायगढ़ जिले के अंतर्गत तहसील पुसौर में पदस्थ रहे पटवारी सच्चिदानंद साहू के विरुद्ध छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, बिलासपुर द्वारा पारित आदेश के पैरा 08 में प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए विभागीय एवं प्रशासनिक कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए थे। उक्त आदेश में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा राज्य शासन के मुख्य सचिव को भी कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।
सच्चिदानंद साहू को 02 नवंबर 2015 को पटवारी के पद पर नियुक्त किया गया था. तहसील पुसौर, जिला रायगढ़ में पदस्थ थे। अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उनके द्वारा 12 अक्टूबर 2020 को पंचनामा तैयार किया गया तथा 26 अक्टूबर 2020 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था. उक्त प्रतिवेदन स्थल निरीक्षण एवं ग्राम कोटवार तथा ग्रामवासियों की उपस्थिति में तैयार किया गया था, जिसके आधार पर तहसीलदार पुसौर द्वारा नामांतरण आदेश पारित किया गया।

उक्त भूमि को लेकर बाद में पक्षकारों के मध्य दीवानी एवं राजस्व विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके संबंध में सिविल न्यायालय, उपविभागीय अधिकारी राजस्व, अतिरिक्त आयुक्त तथा अंततः बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के समक्ष कार्यवाही चली। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने अधीनस्थ अधिकारियों के आदेशों को निरस्त कर पटवारी एवं तहसीलदार के विरुद्ध कठोर टिप्पणियां करते हुए विभागीय जांच के निर्देश जारी कर दिए।

बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के उक्त आदेश को चुनौती देते हुए सच्चिदानंद साहू ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी एवं सिबाशिष मिश्रा के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की. मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई.

याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि बिना कोई अवसर प्रदान किए तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना प्रतिकूल टिप्पणियां एवं विभागीय जांच के निर्देश देना विधि विरुद्ध है। यह भी प्रतिपादित किया गया कि बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र में रहते हुए इस प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी करने अथवा विभागीय कार्यवाही निर्देशित करने का अधिकार नहीं है।

उक्त तर्कों पर प्रथम दृष्टया संतुष्ट होते हुए जस्टिस पीपी साहू ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा याचिकाकर्ता के विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश पर रोक लगाते हुए राज्य शासन सहित सभी संबंधित उत्तरवादियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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