बिलासपुर।छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व सदस्य रविंद्र सिंह ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह बजट गांव, गरीब, मजदूर, महिला कर्मचारी और वृद्धजनों के साथ धोखा है। उनका आरोप है कि बजट में युवाओं और किसानों के हित में कोई ठोस पहल नहीं की गई है, वहीं बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण के लिए भी कोई प्रभावी प्रयास नहीं दिखाई देता।
रविंद्र सिंह ने कहा कि बेरोजगार युवाओं के उत्थान के लिए बजट में कोई ठोस योजना शामिल नहीं है। इसके साथ ही बंद किए गए शासकीय स्कूलों को पुनः प्रारंभ करने के लिए भी किसी प्रकार का बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने आदिवासियों के उत्थान तथा जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए भी किसी स्पष्ट योजना के अभाव की बात कही। किसानों के लिए भी इस बजट में किसी अतिरिक्त लाभ की घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व बजट में किए गए वादे अब तक केवल कागजों तक ही सीमित हैं और दो वर्ष बीत जाने के बाद भी योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी हैं। उन्होंने इस बजट को छत्तीसगढ़वासियों के लिए लोकलुभावन बताते हुए एक बार फिर जनता को छलने का आरोप लगाया।
वहीं, बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने भी राज्य बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा वित्त मंत्री ओपी चौधरी के माध्यम से पेश किया गया बजट 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का जो सपना दिखाता है, वह केवल एक जुमला है। उनका कहना है कि बजट में न तो युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर हैं, न किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और न ही मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी का प्रावधान किया गया है।
महेंद्र गंगोत्री ने आरोप लगाया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी बजट में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आर्थिक उत्थान के लिए भी किसी विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को 2047 जैसे दूरगामी लक्ष्यों की बजाय 2028 या 2033 को ध्यान में रखकर व्यावहारिक बजट तैयार करना चाहिए था। उनके अनुसार, विकसित राज्य का दावा केवल जनता को बहलाने वाला झुनझुना है।
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