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January 11, 2026 7:34 am

पूना मारगेम अभियान के तहत 63 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण

36 इनामी माओवादी शामिल, कुल इनाम राशि 1.19 करोड़ रुपये

दंतेवाड़ा।जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत गुरुवार को 63 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पित माओवादियों में 36 इनामी कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, माड़ क्षेत्र तथा ओडिशा राज्य में सक्रिय रहे हैं। इनमें 18 महिला और 45 पुरुष माओवादी शामिल हैं। आत्मसमर्पित कैडरों में 7 पर 8 लाख रुपये, 7 पर 5 लाख रुपये, 8 पर 2 लाख रुपये, 11 पर 1 लाख रुपये तथा 3 पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पण डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में पुलिस अधीक्षक गौरव राय, सीआरपीएफ दंतेवाड़ा रेंज के उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी, 111वीं वाहिनी के कमांडेंट गोपाल यादव 195वीं वाहिनी के कमांडेंट अनिल कुमार सिंह 230वीं वाहिनी के कमांडेंट अनिल कुमार प्रसाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार बर्मन तथा सीआरपीएफ डीआईजी कार्यालय के उप कमांडेंट विमल कुमार आसूचना की उपस्थिति में हुआ।

पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पित माओवादी विभिन्न वर्षों में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों, एंबुश, आईईडी विस्फोट, आगजनी, सड़क व रेलवे लाइन क्षतिग्रस्त करने तथा सुरक्षा बलों पर फायरिंग जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। इनमें डीवीसीएम स्तर के कैडर सहित कई सक्रिय माओवादी शामिल हैं।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा कि पूना मारगेम अभियान बस्तर में स्थायी शांति सुरक्षा और समग्र विकास की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग केवल पीड़ा और अलगाव की ओर ले जाता है, जबकि पुनर्वास नीति आत्मसमर्पित कैडरों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य प्रदान करती है।

उन्होंने माओवादी कैडरों से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और शांति, सद्भाव व विकास के मार्ग को अपनाएं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार छत्तीसगढ़ शासन, स्थानीय प्रशासन, दंतेवाड़ा पुलिस और सीआरपीएफ क्षेत्र में शांति स्थापना, प्रभावी पुनर्वास और समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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