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January 25, 2026 6:30 pm

जनहित याचिका के साथ 15000 रुपये की सुरक्षा राशि जमा करना अनिवार्य

बिलासपुर. हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाने वालों के लिए अब l 15000 की सुरक्षा राशि जमा करना जरूरी हो गया है. पूर्व में यह सुरक्षा राशि 5000 हुआ करती थी जिसे कुछ समय पूर्व हाईकोर्ट में संशोधित करके 15000 कर दिया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की खंडपीठ में कोरबा के लक्ष्मी चौहान अरुण श्रीवास्तव एवं सपूरन दास की ओर से कोरबा जिला डीएफ फंड में अनियमितता से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान 15000 की धनराशि को माफ करने या इस कम किए जाने का आवेदन खंड पीठ ने स्वीकार नहीं किया। याचिका कर्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और सुदीप वर्मा ने निवेदन किया कि पूर्व में यह धनराशि ₹ 5000 होती थी और अब इसे तीन गुना बढ़ा दिया गया है अतः इसे इस कम कर दिया जाए। इस निवेदन पर खंड पीठ ने असहमति जताई याचिका कर्ता की ओर से यह भी निवेदन किया गया कि यदि बाद में हाई कोर्ट को लगता है कि याचिका गलत विषय पर या गलत तरीके से लगाई गई थी तो याचिका कर्ताओं पर फाइन ठोका जा सकता है इसलिए प्रारंभ मे इतनी बड़ी धनराशि जमा करने में छूट दी जाए। हाई कोर्ट की खंडपीठ को इस तर्क से भी कोई असर नहीं हुआ और कहा कि गंभीर विषय पर जनहित याचिका लगाने वाले लोगों को 15000 जमा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि यदि सुनवाई के बाद उन्हें लगेगा की याचिका वास्तव में जनहित के लिए थी तो यह धनराशि वापस की जा सकती है।

सुनवाई के पश्चात अपने आदेश में खंडपीठ ने कहा कि याचिका कर्ता अगले शुक्रवार तक यह 15000 रुपए की धन राशि जमा करें और उसके बाद 12 जनवरी सोमवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी। अगर यह धनराशि याचिका कर्ता जमा नहीं करते हैं तो याचिका स्वमेव रद्द मानी जाएगी।
जनहित याचिका में कोरबा डीएफ फंड के तहत पिछले 10 सालों में 4000 करोड रुपए के उपयोग के पूर्व डीएमएफ नियमों और अन्य गाइडलाइन के खोल उल्लंघन की बात कही गई है। याचिका में इस फंड के द्वारा लगाई जा रही नौकरियों में प्रभावित व्यक्तियों को मौका न दिए जाने बिना सोचे समझे मनमाने तरीके से बिल्डिंगों में पैसा खर्च करने और कई प्रभावित ग्रहों को लाभ न देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका कर्ताओं के अधिवक्ता ने कहा कि आज के आदेश के बाद वह शीघ्र 15000 रुपए सुरक्षा राशि के रूप में जमा कर देंगे और 12 जनवरी को पुनः जनहित याचिका पर सुनवाई का आग्रह करेंगे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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