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October 21, 2026 4:10 am

हाई कोर्ट ने पति के पक्ष में दिया तलाक का फैसला

बिलासपुर। जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा है कि पति और उसके परिवार पर दहेज उत्पीड़न और टोनही प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता है। हाई कोर्ट ने इस आधार पर पति की तलाक की अर्जी को स्वीकार कर लिया है।

बलौदा बाजार निवासी दिनेश साहू और पद्मा साहू का विवाह 15 फरवरी 2015 को हुआ था। दिनेश का आरोप था कि शादी के 10-11 दिनों बाद ही पत्नी अपने मायके चली गई और उस पर अलग रहने का दबाव बनाने लगी। बाद में पत्नी ने पति, उसके माता-पिता और भाइयों सहित परिवार के 5 सदस्यों पर दहेज प्रताड़ना (498A) और छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करा दी। पति ने बलौदा बाजार के फैमिली कोर्ट में क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की मांग करते हुए मामला प्रस्तुत किया, लेकिन कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि क्रूरता और परित्याग के आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसके खिलाफ पति ने हाई कोर्ट में अपील की थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि पति और परिजनों पर टोनही जैसे गंभीर और अपमानजनक आरोप लगाना मानसिक प्रताड़ना है। पति और उसके परिवार को 7 सालों तक झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ा, यह अपने आप में एक गंभीर मानसिक पीड़ा है। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी है। पत्नी को छूट दी गई है कि वह धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता के लिए अलग से आवेदन कर सकती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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