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June 13, 2026 6:29 pm

निर्माता-निर्देशक निखिल सुंदरानी का योगदान सबसे कम उम्र की पंडवानी गायिका बेबी हिना साहू की खोज

बिलासपुर ।छत्तीसगढ़ की मिट्टी में लोक कला और संस्कृति की जड़ें गहरी बसी हुई हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं महज़ 9 वर्षीय पंडवानी गायिका बेबी हिना साहू जो ग्राम जरोद भाटापारा की निवासी हैं।

बेबी हिना ने अपनी नन्ही उम्र में ही गुरु कबीर साहेब की जन्म कथा और भक्ति गीतों को सुर और ताल में पिरोकर प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है। उनकी कला और अदाकारी को पहचान दिलाने का श्रेय जाता है युवा निर्माता-निर्देशक निखिल सुंदरानी को जिन्होंने अपने सुंदरानी स्टूडियो में हिना के गीतों और कथाओं की रिकॉर्डिंग कर यूट्यूब प्रसारण के माध्यम से दुनिया तक पहुँचाया।

गौरतलब है कि निखिल सुंदरानी पिछले 6 वर्षों से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कार्यरत हैं। उन्होंने ग्रामीण अंचलों से सैकड़ों गीत-संगीत और कथाएँ संकलित कर यूट्यूब के माध्यम से प्रस्तुत की हैं चाहे वह तीज-तिहार के लोकगीत हों, भक्तिन कर्मा माता की कथाएँ परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा के उपदेश हों, बूढ़ा देव की गाथाएँ या माँ दुर्गा की आराधना।

इसी श्रंखला में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सबसे कम उम्र की पंडवानी गायिका बेबी हिना साहू को मंच दिया। आज हिना न केवल अपने गाँव या प्रदेश तक सीमित हैं, बल्कि अपनी आवाज़ और कला के माध्यम से वैश्विक दर्शकों तक पहुँच रही हैं।

निखिल सुंदरानी ने कहा कि कबीर सात संग में बड़ी जरोद भाटापारा की निवासी हिना साहू गीत-संगीत और नृत्य-कला में विलक्षण प्रतिभा की धनी हैं। उनकी लगन और निखार ही उन्हें आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी लोककला का चमकता सितारा बनाएगी।

बेबी हिना साहू की कला और निखिल सुंदरानी की दृष्टि, दोनों मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा न केवल जीवित है, बल्कि नई पीढ़ी की रचनात्मकता से और भी समृद्ध हो रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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