भाजपा का मास्टर स्ट्रोक, बदलाव के पीछे के क्या मायने?
प्रदेश भाजपा के संगठन में जिस अंदाज में भाजपा ने बदलाव किया है, उससे तो प्रादेशिक दिग्गज से लेकर विपक्षी रणनीतिकार भी भौचक हैं। तेज तर्रार नेत्री स्मृति ईरानी से लेकर यूपी के तेज तर्रार संगठनकर्ता को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी देने का मतलब साफ है, दिल्ली आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी तरफ से कोई अतिरिक्त जोखिम उठाना नहीं चाहता है, या यूं कहें,अतिरिक्त जोखिम उठाने के मूड में दिल्ली नहीं है। संगठन महामंत्री की भी दिल्ली ने विदाई कर दी है। लंबे अरसे से छत्तीसगढ़ की भाजपा की राजनीति और संघ के संगठनात्मक ढांचे में फिट बैठने वाले पवन साय की विदाई को लेकर रणनीतिकार मायने निकाल रहे हैं। मायने निकालना, संभावनाएं टटोलना तो लगा ही रहेगा। जो कुछ दिल्ली ने छत्तीसगढ़ भाजपा में किया है, इस बदलाव का असर कहां और किस अंदाज में होगा यह भी देखने वाली बात होगी।
प्रदेश कांग्रेस सह प्रभारी के बयान को लेकर बवाल या फिर सबकुछ ओके
पीसीसी चेयरमैन को लेकर बीते कुछ महीने से छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली के बीच जो कुछ चल रहा है या फिर जो कुछ चला, उसे लेकर प्रादेशिक राजनीतिक में कयास लगाए जा रहे हैं, अटकलबाजी और कयासों के बीच प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी विजय जांगिड़ को यह क्यों कहना पड़ गया, आगामी विधानसभा चुनाव दीपक बैज के नेतृत्व में ही प्रदेश कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। सरगुजा से लेकर बस्तर, सक्ती से लेकर पाटन के बीच जो कुछ चल रहा है, उसे देखते हुए जांगिड़ के बयान के मायने निकाले जा रहे हैं। सवाल यह भी, क्या जांगिड़ के बयान के बाद कुर्सी दौड़ थम जाएगी या फिर दौड़ और जोर पकड़ेगा।
संगठन के बाद कहीं सत्ता में तो नजर आएगा तब्दीली
दिल्ली ने प्रदेश भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव कर दिया है। संगठन में फेरबदल के बाद प्रदेश की सत्ता हो या फिर विपक्षी राजनीति, एक ही कयास लगाए जा रहे हैं, क्या आने वाले दिनों में संगठन की तर्ज पर सत्ता में भी बदलाव नजर आएगा। दिल्ली की सोच क्या है, और मूड का क्या। यह तो दिल्ली ही जाने, पर प्रदेश संगठन में जिस अंदाज में बदलाव देखने को मिला है, सत्ता के गलियारे में भी अब इसी तरह के रद्दोबदल को लेकर संभावनाएं देखी जा रही है। यकीन करिए, संभावनाएं टटोलने वालों में सत्ता से जुड़े दिग्गज से लेकर ब्यूरोक्रेट्स भी हैं।
दो दिग्गजों की अदालती लड़ाई होगी रोचक
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए सांसद विजय बघेल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए पूर्व विधायक प्रेम प्रकाश पांडेय ने याचिका दायर की है। दोनों विधायक को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब हाई कोर्ट में अदालती लड़ाई शुरू होगी। दो दिग्गजों की चुनावी लड़ाई किस मोड़ पर जाकर रुकती है, यह तो देखने वाली बात रहेगी, जीत-हार को लेकर भी दिग्गजों और समर्थकों की नजरें लगी रहेगी।
अटकलबाजी
प्रदेश भाजपा में जिस अंदाज में सर्जरी हुई है, सत्ता के गलियारे में भी क्या यह दिखाई देगा। संभावनाएं टटोलने वाले टटोल रहे हैं। आपको क्या लगता है?
प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी जांगिड़ को यह क्यों कहना पड़ा, पीसीसी चेयरमैन की कुर्सी बदलने वाला नहीं है। जांगिड़ के दावों पर कितना दम है।
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