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September 23, 2026 10:25 pm

उत्तम त्याग धर्म के संदेश से गूंजा दसलक्षण महापर्व

माता जी ने कहा- धर्म और आत्मा को जीवित रखने के लिए त्याग जरूरी, ‘16 स्वर्ग’ की भव्य प्रस्तुति ने मोहा मन

CBN36 बिलासपुर। श्री दिगंबर जैन समाज की ओर से मनाए जा रहे दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन बुधवार को ‘उत्तम त्याग धर्म’ के रूप में धार्मिक आयोजन हुए। क्रांतिनगर स्थित 1008 श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर महाराज की शिष्याएं आर्यिका श्री 105 अकंप मति माता जी और आर्यिका श्री 105 अचल मति माता जी के सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

प्रवचन में माता जी ने कहा कि धन से सुख नहीं, बल्कि त्याग से आनंद मिलता है। पांच इंद्रियों से मिलने वाला सुख क्षणिक है, जबकि त्याग से आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि त्याग के बिना कोई भी धर्म जीवित नहीं रह सकता। धर्म और आत्मा को जीवित रखने के लिए त्याग आवश्यक है। मनुष्य को भोग-विलास की वस्तुओं के साथ-साथ जीवन के खराब कार्यों और पापों का भी त्याग करना चाहिए। यही मानव जीवन की सार्थकता और मुक्ति का मार्ग है।

माता जी ने दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दान चार प्रकार का होता है- आहार दान, अभय दान, उपकरण दान और औषधि दान। कर्मों के क्षय के लिए दान करना चाहिए। दान ऐसा हो कि एक हाथ से दिए गए दान की जानकारी दूसरे हाथ को भी न हो। उन्होंने कहा कि पंचम काल के अंत तक साधु रहेंगे और जब तक साधु तथा धर्म रहेंगे, तब तक दान की परंपरा भी बनी रहेगी।

तत्त्वार्थ सूत्र का किया वाचन

दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन ‘उत्तम त्याग’ धर्म पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। ज्योति जैन, रीना जैन, श्वेता जैन, रजनी जैन, निधि जैन, रागिनी जैन, शालिनी जैन, मनोरमा जैन, रंजीता जैन, सुमन लता जैन, एकता जैन और समता जैन ने वाचन किया। इससे पहले श्रद्धालुओं ने अभिषेक एवं शांतिधारा की।

‘16 स्वर्ग’ की भव्य प्रस्तुति ने मोहा मन

धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में बुधवार को ‘16 स्वर्ग’ की भव्य प्रस्तुति की गई। जैन धर्म की मान्यताओं के अनुरूप स्वर्गों की संरचना, इंद्र-इंद्राणियों के स्वरूप, उनके मुकुटों के अलग-अलग चिह्न तथा वैभव को मंचन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। प्रस्तुति में इंद्र अपनी-अपनी इंद्राणियों के साथ नंदीश्वर द्वीप में पूजा के लिए जाते हुए दर्शाए गए।

डॉ. सुप्रीत जैन एवं डॉ. श्रुति जैन के निर्देशन में हुई प्रस्तुति में इंद्र-इंद्राणी की भूमिकाओं में प्रवीण-शकुन जैन, विनोद-रंजना जैन, सुकुमार-सरिता जैन, डॉ. पीसी वासल-रंजनी वासल, राकेश-सुनीता जैन, सनत-आशा जैन, कैलाश-मंगला जैन, प्रमोद-रेखा जैन, अरुण-आशा जैन, दिनेश-ऊषा जैन, सत्येंद्र-निधि जैन, पदम-ममता जैन, सुनील-नमिता जैन और शैलेश-शालिनी जैन ने सहभागिता की।

बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए भोजन व्यवस्था

पर्व के दौरान बाहर से आए श्रावक-श्राविकाओं के लिए क्रांतिनगर जैन भवन में प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था की जा रही है। यह व्यवस्था समाज के संरक्षक श्रीमंत सेठ प्रवीण-शकुन जैन, श्रीमंत सेठ विनोद-रंजना जैन और सुकुमार-सरिता जैन परिवार की ओर से की गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसका लाभ ले रहे हैं।

धार्मिक आयोजनों में प्रवीण जैन, विनोद जैन, शकुन जैन, रंजना जैन, सुकुमार जैन, सनत जैन, दीपक जैन, जय कुमार जैन, कैलाश जैन, भूपेंद्र चंदेरिया, विशाल जैन, प्रकाश जैन, रंजनी वासल, राकेश जैन, सुनीता जैन, आशा जैन, मंगला जैन, प्रमोद जैन, रेखा जैन, अरुण जैन, दिनेश जैन, ऊषा जैन, सत्येंद्र जैन, निधि जैन, पदम जैन, ममता जैन, सुनील जैन, नमिता जैन, शैलेश जैन, शालिनी जैन सहित समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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