बिहान से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी, पशुपालन और सब्जी उत्पादन से खड़ा किया आय का मजबूत जरिया
CBN36 रायपुर, 23 सितंबर। गांव में रहकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सपना देखने वाली पेण्ड्रा विकासखंड के अमरपुर गांव की निधि तिवारी अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। कभी सीमित संसाधनों के बीच गुजर-बसर करने वाली निधि ने स्व सहायता समूह से जुड़कर पशुपालन और सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का जरिया बनाया। मेहनत और समूह से मिली आर्थिक मदद का नतीजा यह रहा कि उनकी सालाना आय अब करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गई है।
निधि जून 2023 में दीप महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी थीं। वर्तमान में वह समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के महज तीन महीने बाद उन्होंने चक्रिय निधि (आरएफ) से मिले 10 हजार रुपये की मदद से जर्सी नस्ल की गाय खरीदी। गाय से प्रतिदिन करीब 15 लीटर दूध का उत्पादन होने लगा। इससे उन्हें नियमित आमदनी का जरिया मिल गया।
60 हजार की मदद से शुरू की सब्जी बाड़ी
पशुपालन के बाद निधि ने अपनी आजीविका का दायरा बढ़ाया। करीब छह महीने बाद उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से 60 हजार रुपये की सहायता मिली। अपनी बचत और अन्य संसाधनों को जोड़कर उन्होंने सब्जी बाड़ी शुरू की। मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की खेती करने लगीं। धीरे-धीरे सब्जी उत्पादन उनकी आय का दूसरा बड़ा स्रोत बन गया।
40 रुपये किलो तक बिका टमाटर
निधि ने मार्च में अपने खेत में टमाटर की फसल लगाई। फसल तैयार होने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर टमाटर की बिक्री शुरू की। करीब 40 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री होने से उन्हें अच्छी आमदनी मिली। दूध के साथ सब्जी उत्पादन जुड़ने से उनकी आय के स्रोत बढ़े और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत हुई।
‘बिहान’ से मिला आगे बढ़ने का रास्ता
निधि का कहना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता के साथ समूह का सहयोग और आजीविका को आगे बढ़ाने की दिशा मिली। उन्होंने पशुपालन से शुरुआत की और बाद में सब्जी उत्पादन को भी इसमें जोड़ लिया। अब इसी आमदनी से वह परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
समूह से जुड़ी महिलाएं बना रहीं आय के नए साधन
निधि की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए स्व सहायता समूहों के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे आजीविका अवसरों की तस्वीर भी पेश करती है। वित्तीय सहायता, सामूहिक सहयोग और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर महिलाएं पशुपालन, कृषि और छोटे उद्यमों को आय का स्थायी जरिया बना रही हैं। केंद्र सरकार की ‘लखपति दीदी’ पहल का उद्देश्य भी महिलाओं की टिकाऊ वार्षिक आय को कम से कम एक लाख रुपये तक पहुंचाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
छत्तीसगढ़ में ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला स्व सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमिता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
मेहनत से बदली तस्वीर
निधि तिवारी की कहानी बताती है कि गांव में सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सही अवसर, आर्थिक सहयोग और मेहनत का साथ मिले तो महिलाएं अपनी आय बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। एक गाय से शुरू हुआ सफर अब पशुपालन और सब्जी उत्पादन तक पहुंच चुका है और निधि की सालाना आय ढाई लाख रुपये के करीब है।
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