बिलासपुर में सेमिनार में एसएसपी रजनेश सिंह ने बताए ठगी के नए तरीके, ओटीपी-पिन साझा नहीं करने की दी हिदायत
CBN36 बिलासपुर। साइबर ठगों के जाल से बचने के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक, अनजान कॉल पर भरोसा या ओटीपी साझा करना बैंक खाते पर भारी पड़ सकता है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल की ओर से बुधवार को नार्थ ईस्ट इंस्टीट्यूट सभागार में आयोजित साइबर जागरूकता सेमिनार में रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और बचाव के तरीकों से अवगत कराया गया।
सेमिनार में बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने साइबर अपराध के अलग-अलग तरीकों, ठगों की कार्यप्रणाली और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध से बचने के लिए हर व्यक्ति को जागरूक और सावधान रहना जरूरी है।
ओटीपी-पिन मांगे तो समझें खतरे की घंटी
एसएसपी ने कर्मचारियों को स्पष्ट सलाह दी कि किसी भी अनजान फोन कॉल, मैसेज, ई-मेल या लिंक पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। ओटीपी, पासवर्ड, एटीएम/डेबिट कार्ड पिन और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। उन्होंने साइबर ठगी में जल्दबाजी और डर का फायदा उठाकर लोगों को फंसाने वाले तरीकों से भी सावधान किया।
ठगी होते ही दे सूचना, कार्रवाई में देरी न करें

सीएसपी गगन कुमार ने साइबर अपराध की घटना होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने से आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलती है। उन्होंने कर्मचारियों से डिजिटल लेन-देन के दौरान सजग रहने और संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तुरंत संबंधित माध्यम को सूचना देने की अपील की।
कार्यक्रम में अपर मंडल रेल प्रबंधक जेएस मीना, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी डॉ. अंशुमान मिश्रा, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक पूनम चौधरी, डीएसपी सुदीप सरकार समेत रेलवे के अधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
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