हॉर्नबिल संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार, पीवीटीजी गांवों में बढ़ी दुर्लभ पक्षी की संख्या
रायपुर, 24 जून। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली पहल के तहत जल्द ही ‘हॉर्नबिल सफारी’ शुरू की जाएगी। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांव ओढ़, अमलोर और आमामोरा में इस सफारी को प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना है।
वन विभाग के अनुसार, विभाग संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास दोनों को लाभ मिल रहा है।
पिछले चार वर्षों में रिजर्व क्षेत्र में मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वन विभाग का कहना है कि एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण और रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी पहलों के कारण यह सफलता मिली है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण रही है।
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं। इनके प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हुआ है।
प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है।
वन विभाग स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण भी दे रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए नेचर गाइड और हॉर्नबिल गाइड के रूप में कार्य करेंगे। इससे उन्हें रोजगार और आय के स्थायी अवसर मिलेंगे तथा सामुदायिक आधारित इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न प्रजातियों के कठफोड़वा, बार्बेट और मिनिवेट सहित अनेक स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की विविधता देखने को मिलती है।
यह क्षेत्र भारतीय विशाल गिलहरी और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वैज्ञानिक वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता का सफल उदाहरण है। हॉर्नबिल सफारी शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलने के साथ ग्रामीण विकास को भी गति मिलेगी।
वन विभाग ने बताया कि पर्यटक अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 7976688165 और 7566510937 पर संपर्क कर सकते हैं।
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