
कल्चरल मार्क्सवाद पर बिलासपुर में ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र, विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन की जरूरत पर दिया जोर
CBN 36 बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में कल्चरल मार्क्सवाद अध्ययन समूह, बिलासपुर की ओर से वर्तमान परिस्थितियों में ‘कल्चरल मार्क्सवाद’ विषय पर विशेष ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चंद्र मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस दौरान छत्तीसगढ़ प्रांत के वरिष्ठजनों और विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे।
कार्यक्रम में क्षेत्र साहित्य प्रमुख विश्वजीत, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सारस्वत और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एलपी पटेरिया मंचासीन रहे।
समाज में फैलने वाले नैरेटिव पर चर्चा
कार्यक्रम का उद्देश्य कल्चरल मार्क्सवाद के विभिन्न पहलुओं और वर्तमान परिस्थितियों में उसके प्रभाव पर चर्चा करना था। इसमें शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं, अधिवक्ताओं और प्रबुद्धजनों ने हिस्सा लिया। अध्ययन रिपोर्ट के तहत शिक्षा क्षेत्र से डॉ. गीता सिंह, कला एवं मनोरंजन क्षेत्र से देवेंद्र, कानूनविद गौरव सिंघल और शिक्षा अनुसंधान से शोधार्थी शीलू साहू ने अपने विचार रखे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के परिचय के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर वंदे मातरम का गान किया गया। वक्ताओं ने वर्तमान समय में समाज में बढ़ती अराजकता और टकराव को लेकर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने इसे कल्चरल मार्क्सवाद के प्रभाव से जोड़ते हुए इस विषय को समझने की आवश्यकता बताई।
समाज को वैचारिक रूप से जागरूक करने पर जोर
मुख्य वक्ता कैलाश चंद्र ने कहा कि इस अध्ययन और मंथन का उद्देश्य समाज में व्याप्त परिस्थितियों का अध्ययन करना और उनसे निपटने के लिए वैचारिक रूप से जागरूक लोगों को तैयार करना है। उन्होंने कल्चरल मार्क्सवाद से जुड़े विषयों को समझने और समाज को भ्रमित करने वाले नैरेटिव से सचेत रहने पर जोर दिया।
क्षेत्र साहित्य प्रमुख विश्वजीत ने कल्चरल मार्क्सवाद की मूल अवधारणाओं और वैचारिक पक्ष पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र का उद्देश्य समाज में फैलने वाले विभिन्न नैरेटिव को समझना और उनके प्रभाव पर विचार करना है।
इंटरकास्ट मैरिज के सवाल पर भी हुई चर्चा
प्रश्नोत्तरी सत्र में युवाओं के बीच इंटरकास्ट मैरिज को लेकर सवाल किया गया और पूछा गया कि क्या इसे कल्चरल मार्क्सवाद के प्रभाव से जोड़कर देखा जा सकता है। इस पर कैलाश चंद्र ने विवाह को मन, विचार, आत्मा और शरीर के मिलन से जुड़ी व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि विवाह के संबंध में सामाजिक परिस्थितियों और आपसी विचारों को भी समझना जरूरी है।
विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन की जरूरत

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे विषयों पर विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन और विमर्श होना चाहिए, ताकि समाज विभिन्न नैरेटिव को समझ सके और किसी भी प्रकार के भ्रम से बच सके।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती शीलू साहू ने किया। समापन पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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