“नकली वाहन नंबरों पर बनाए बिल, कंपनी से भुगतान कराया और छह खातों में पहुंचाई रकम; साथी पहले ही पकड़ा जा चुका”

“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर आर्थिक धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी”
CBN36 रायगढ़। एक ही वाउचर नंबर… अलग-अलग वाहनों के नाम… और फिर उसी आधार पर लाखों का भुगतान। ट्रांसपोर्ट कंपनी में हुए करीब 32 लाख रुपये के इस कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने के बाद पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी प्रकाश मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने सह आरोपी दीपक शर्मा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर कंपनी से भुगतान कराया और रकम अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाई।
प्रकाश मिश्रा पुलिस की लगातार दबिश के बीच न्यायालय में पेश हुआ। न्यायालय की अनुमति के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया। मामले में दीपक शर्मा को पुलिस 29 जुलाई को ही गिरफ्तार कर चुकी है।
वाउचर एक, वाहन कई
श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक के संचालक कमल किशोर शाह ने 24 मार्च को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। कंपनी की आंतरिक जांच में एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आए। इसके बाद सितंबर 2025 से चल रहे कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई।
पुलिस के मुताबिक आरोपी अलग-अलग वाहनों के नाम पर डुप्लीकेट वाउचर तैयार करते और इन्हीं के आधार पर कंपनी से भुगतान कराते थे। रकम संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों में पहुंचाई गई।
जिन वाहनों के नाम पर बिल, वे ट्रांसपोर्ट के काम में ही नहीं थे
मामले की जांच में पुलिस ने बिलों में दर्ज वाहन नंबरों का आरटीओ से सत्यापन कराया तो फर्जीवाड़े की एक और परत खुली। कई वाहन नंबर दोपहिया और छोटे निजी वाहनों के निकले। इनका श्रीराम ट्रांसपोर्ट से कोई संबंध नहीं था।
पुलिस ने वाहन मालिकों से पूछताछ की तो उन्होंने भी किसी तरह का माल परिवहन कार्य करने से इनकार किया। इसके बाद फर्जी बिल बनाकर कंपनी से भुगतान लेने की बात जांच में सामने आई।
कमीशन काटकर लौटती थी रकम
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार दीपक शर्मा ने पूछताछ में बताया कि बैंक खातों में रकम पहुंचने के बाद खाताधारक अपना कमीशन काटकर शेष राशि आरोपियों के बताए खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों पर भेज देते थे।
पुलिस का दावा है कि दीपक ने करीब 15 लाख रुपये खुद रखने और 16-17 लाख रुपये प्रकाश मिश्रा को देने की जानकारी दी है।
डिजिटल लेनदेन की भी जांच
पुलिस के मुताबिक प्रकाश मिश्रा ने पूछताछ में फर्जी बिल-वाउचर तैयार करने और दीपक शर्मा के साथ मिलकर रकम हासिल करने संबंधी जानकारी दी है। कथित तौर पर PayTM और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी लेनदेन किया गया। अब पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।
मामले में कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 187/2026 के तहत बीएनएस की धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2) और 60 में केस दर्ज किया है।
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