बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कहा है पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना का झूठा केस दर्ज कराना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने धमतरी फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए पति की तलाक की अर्जी को स्वीकार कर ली है।
धमतरी निवासी धर्मेंद्र साहू का विवाह 28 अप्रैल 2009 को संध्या साहू के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। विवाह के बाद उनकी दो बेटियां हुई। 10 अप्रैल 2017 को पत्नी ने पति, देवर और सास के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए धारा 498ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई। पत्नी मायके चली गई और तब से वापस नहीं आई। इसके करीब पांच साल बाद वर्ष 2022 में पत्नी के आरोप साबित नहीं कर पाने के आधार पर धमतरी की कोर्ट ने पति और उसके परिजनों को बाइज्जत बरी कर दिया था। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया और क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था। धमतरी के फैमिली कोर्ट ने 17 अगस्त 2023 को मामला खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पति और उसके बुजुर्ग परिजनों ने 5 साल तक आपराधिक मुकदमे का सामना किया। गिरफ्तारी की आशंका और समाज में प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचना पति के लिए गंभीर मानसिक आघात जैसा है। कहा कि जब किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों के कारण मुकदमे से गुजरना पड़ता है और वह अंततः बरी हो जाता है, तो यह नहीं माना जा सकता कि उसके साथ क्रूरता नहीं हुई। माना कि पति के प्रति पत्नी का व्यवहार क्रूर था। इसी आधार पर 2009 में हुई शादी को भंग करने का आदेश दिया गया। हालांकि, हाई कोर्ट ने पत्नी को भविष्य में स्थायी गुजारा भत्ता के लिए अलग से आवेदन करने की छूट दी है।
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