मुख्यमंत्री के नाम संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन, फर्जी दस्तावेज पेश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग
CBN36 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई ने सर्पदंश जनित मृत्यु के राहत प्रकरणों में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को अनावश्यक रूप से आपराधिक जांच के दायरे में लाए जाने पर चिंता जताई है। संघ ने मुख्यमंत्री के नाम संभागायुक्त सुनील जैन को ज्ञापन सौंपकर निर्दोष अधिकारियों को विधिक संरक्षण देने और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि प्राकृतिक आपदा राहत मामलों में राजस्व न्यायालय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेते हैं। यदि बाद में दस्तावेज फर्जी या कूटरचित पाए जाते हैं तो कार्रवाई दस्तावेज तैयार करने, प्रमाणित करने अथवा प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ होनी चाहिए, न कि वैधानिक आदेश पारित करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध।
संघ ने मांग की कि न्यायालय के समक्ष फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर राहत राशि प्राप्त करने के मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 से 231 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रभावी विवेचना और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए। ऐसे मामलों को केवल सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि ‘फ्रॉड अपॉन द कोर्ट’ के रूप में माना जाए।
ज्ञापन में न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985 और राज्य शासन के 14 अक्टूबर 2024 के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। साथ ही प्राकृतिक आपदा राहत प्रकरणों की जांच के लिए पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के बीच समन्वित एसओपी लागू करने का आग्रह किया गया।
इस दौरान अपर कलेक्टर डॉ. ज्योति पटेल, एसडीएम मनीष साहू, प्रवेश पैकरा, शिवकुमार कंवर, नितिन तिवारी, डिप्टी कलेक्टर गबेल सहित प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
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