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February 5, 2026 8:34 pm

पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना समय की आवश्यकता: आईजी गर्ग


चेतना हाल में हुआ अनुभव क्यूआर कोड का शुभारंभ,रेंज के सभी जिलों में एक साथ लागू,रेंज के अन्य जिलों के एसपी ने भी रखे विचार

बिलासपुर। आज के डिजिटल युग में पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। जनता और पुलिस के बीच संवाद को आसान, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए अब थानों में क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। इससे आम नागरिक पुलिस के कार्यों को लेकर अपना फीडबैक और अनुभव सीधे आईजी कार्यालय तक पहुंचा सकेंगे। यह बात आईजी रामगोपाल गर्ग ने अनुभव क्यूआर कोड सिस्टम के शुभारंभ अवसर पर कही।


चेतना हाल में हुआ अनुभव क्यूआर कोड का शुभारंभ


पुलिस लाइन स्थित चेतना हाल में गुरुवार को अनुभव क्यूआर कोड सिस्टम की विधिवत शुरुआत की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईजी  रामगोपाल गर्ग ने कहा कि यह पहल पुलिस और आमजन के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब आम नागरिक सरल तकनीक के माध्यम से पुलिस के साथ अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। आईजी ने बताया कि बिलासपुर रेंज के सभी आठ जिलों के थानों और पुलिस कार्यालयों में क्यूआर कोड लगाए जा चुके हैं और आज से यह व्यवस्था एक साथ प्रारंभ कर दी गई है।



केवल शिकायत नहीं, अच्छे कार्यों को भी मिलेगा प्रोत्साहन


आईजी रामगोपाल गर्ग ने स्पष्ट किया कि अनुभव क्यूआर कोड का उद्देश्य केवल शिकायतें प्राप्त करना नहीं है। इसका एक बड़ा उद्देश्य अच्छा कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान करना भी है। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी थाना या पुलिसकर्मी से उन्हें अच्छा अनुभव मिला हो, तो उसे भी अवश्य साझा करें। इससे सकारात्मक कार्यों को पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा तथा पुलिसिंग की गुणवत्ता और बेहतर होगी।

रेंज के सभी जिलों में एक साथ लागू


आईजी गर्ग ने बताया कि यह व्यवस्था बिलासपुर रेंज के सभी आठ जिलों में एक साथ लागू की गई है। रेंज के अंतर्गत आने वाले सभी थानों और पुलिस कार्यालयों में क्यूआर कोड स्थापित कर दिए गए हैं। अब कोई भी नागरिक थाना परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कर सकता है।अनुभव क्यूआर कोड को स्कैन करते ही नागरिक के मोबाइल पर एक सरल गूगल फॉर्म खुलता है। इस फॉर्म में प्रश्नोत्तर के माध्यम से थाना या पुलिस कार्यालय से जुड़े अपने अनुभव साझा किए जा सकते हैं। फॉर्म सबमिट होते ही संबंधित फीडबैक सीधे आईजी कार्यालय में दर्ज हो जाएगा। इस प्रणाली की खास बात यह है कि फीडबैक देने वाला व्यक्ति चाहे तो अपनी पहचान और मोबाइल नंबर पूरी तरह गोपनीय रख सकता है। पहचान देना पूरी तरह वैकल्पिक रखा गया है, जिससे आमजन बिना किसी भय या दबाव के अपनी बात खुलकर रख सकें।

दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म: कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुलिस प्रशासन की अत्यंत सराहनीय और जनहितकारी पहल है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से आम नागरिकों को अपनी समस्या या सुझाव रखने के लिए वरिष्ठ कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वे सीधे अपनी बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर ने इसे प्रशासन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने वाला कदम बताया।


नवाचार समय की मांग है: संभाग आयुक्त आईएएस सुनील जैन


संभागायुक्त सुनील जैन ने अपने संबोधन में कहा कि नवाचार को अपनाना आज के समय की मांग है। उन्होंने कहा कि हम स्वयं अपने काम का मूल्यांकन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हम जनता के सेवक हैं, इसलिए हमारे काम का मूल्यांकन भी जनता के माध्यम से ही होना चाहिए।
संभागायुक्त ने अनुभव क्यूआर कोड को ऐसा माध्यम बताया, जिससे पुलिस को अपनी कार्यशैली में निरंतर सुधार करने का अवसर मिलेगा।



जिले के सभी थानों में लगाए गए क्यूआर कोड-एसएसपी आईपीएस रजनेश सिंह


एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि जिले के सभी थानों में अनुभव क्यूआर कोड लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि थाने में आने वाले प्रत्येक फरियादी का अनुभव बेहद महत्वपूर्ण होता है। एसएसपी ने बताया कि नागरिकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर पुलिस व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने इस पहल को आईजी रामगोपाल गर्ग की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताते हुए कहा कि यह पुलिसिंग को और बेहतर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

रेंज के अन्य जिलों के एसपी ने भी रखे विचार


कार्यक्रम के दौरान रायगढ़ के एसएसपी शशिमोहन सिंह, मुंगेली एसएसपी भोजराम पटेल तथा कोरबा के एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने अनुभव को एक सार्थक और व्यवहारिक पहल बताते हुए कहा कि इससे थानों में आने वाले फरियादियों की समस्याओं को रियल टाइम में समझने और उनके त्वरित समाधान में मदद मिलेगी। साथ ही पुलिसिंग को और अधिक मजबूत और जनोन्मुखी बनाया जा सकेगा।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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