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January 11, 2026 9:42 pm

कानाफूसी

ये तो छत्तीसगढ़ की परंपरा के विपरीत है


देश के साथ ही छत्तीसगढ़ में अतिथि सम्मान की विशिष्ट परंपरा रही है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी निरंतर जारी है। हमारे बड़े बुजुर्ग हमेशा इस बात की सीख देते हैं कि बड़ों का सम्मान और अतिथियों को देव का दर्ज दिया जाए। तभी तो अतिथि देवा भव: कहा जाता है। छत्तीसगढ़ की इस परंपरा को छत्तीसगढ़ से दूर के रहवासी ने ना केवल तार-तार कर दिया,वरन उनकी इस हरकत से छत्तीसगढ़ की माटी भी शर्मसार हो गई। वाकया गुरुघासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी का है। यहां कथाकार का कुलपति ने ना केवल अपमान किया,साथ ही सभा से अपमानित कर बाहर भी कर दिया। गैर छत्तीसगढ़िया क्या जाने,यहां की परंपरा,यहां की माटी की सोंधी खुशबू और अतिथि देवो भव: का ना रुकने व ना टूटने वाली परंपरा। उनकी इस हरकत के लिए जितनी निंदा की जाए कम ही है। अब तो इस बात को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। देखने वाली बात ये रहेगी कि अतिथि परंपरा को पैरों तले कुचलने वाले कुलपति की जीत होती है या फिर छत्तीसगढ़ की परंपरा और पुरातन संस्कृति की। आगे-आगे देखते हैं, होता क्या है।

हैलो, दिल्ली से बोल रहा हूं, और कार्यक्रम टांय-टांय फिस्स


सकरी में गजब का तामझाम था। भव्य मंच, मंच पर चमचमाती कुर्सियां, मंच के सामने कलरफुल बिछी कुर्सियां। अफसरों की आवाजाही। गाड़ियों में ग्रामीणों के आने का क्रम भी जारी हो गया था, जैसा कि कार्यक्रम मैनेजर भीड़ बढ़ाने के लिए इंतजाम करते हैं, उसकी झलक कार्यक्रम स्थल पर दिखाई दे रही थी। अफसर भी अब तक पहुंचने वाले थे। कुछ तो पहुंच भी गए थे। वीआईपी के साथ आने वाले तैयारी कर रहे थे। इसी बीच शहर सरकार के आला अफसर के मोबाइल की घंटी बजी। रिसीव करते हुए दिल्ली से बोल रहा हूं, जैसी सर्द आवाज गूंजी। वे अटेंशन हो गए। फिर जो कुछ हुआ, अफसर का चेहरा लटक गया। दिल्ली से फोन कट, फिर एक आला अफसर की मोबाइल की घंटी बजी, कॉल रिसीव हुआ, दिल्ली से हो रहे वार्तालाप से मूड ऑफ हो गया। अफसर सकरी के बजाय मंत्रीजी के बंगले की तरफ दौड़ लगाई। बस फिर क्या था, कार्यक्रम कैंसिल। बहाने बनाए गए, ये भी जोड़ना था, वो भी जोड़ना था। जोड़ना कुछ नहीं था, मंत्री को बायकॉट करने का खामियाजा भुगतना पड़ा। अब तो बस यही चर्चा है, दोनों में किसकी चल गई।

ग्रामीणों की लात ने लॉ एंड आर्डर की खोली पोल


तमनार में जो कुछ घटा, वह बेहद चिंताजनक के साथ ही लज्जाजनक भी रहा। कोल माइंस से विस्थापित हो रहे ग्रामीणों की दिक्कतों और भीतर ही भीतर फूट रहे गुस्से को किसी ने ना तो समझने की कोशिश की और ना ही नजदीक से देखने की जहमत ही उठाई। बस फिर क्या था, ग्रामीणों की लात लॉ एंड आर्डर पर पड़ी। लात पड़ते ही इंटेलिजेंस की पोल खुल गई। एसपी के पोलिसिंग और लॉ एंड आर्डर की पोल भी खुल गई। एक लात ने सब कुछ साफ कर दिया। इस घटना के बाद तो अब तक आला अफसर की छुट्टी हो जानी थी, पुलिस अफसरों के बीच इस बात की चर्चा भी हो रही है। एक चर्चा और भी, दिल्ली और गुजरात कनेक्शन। गुजरात कनेक्शन है,तब तो बात ही कुछ अलग है। पर चर्चा तो जरुर है। कोई और होते तो अब तक लूप लाइन में चले गए होते।

संगठन सृजन का दूसरा दौर


कांग्रेस में संगठन सृजन का जल्द ही दूसरा दौर देखने को मिलेगा। जिला व शहर अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है। दूसरे दौर के सृजन में शहर व जिलाध्यक्षों से रायशुमारी ली जाएगी। चर्चा इस बात की भी हो रही है, निवृतमान अध्यक्षों की सूची को फालो किया जाएगा या फिर नए सिरे से नाम मंगाए जाएंगे। नए सिरे से नाम मंगाए जाने का मतलब पुराने अध्यक्षों की सूची को रद्दी की टोकरी में डालना होगा। ये कांग्रेस है। इतना आसान होने वाला नहीं है। संगठन सृजन के नाम पर दिग्गज नेताओं ने जैसे जिले आपस में बांट लिए, ब्लाॅक अध्यक्षों की ताजपोशी में भी इसी पैटर्न पर जिला बांटने की चर्चा हो रही है। एक कांग्रेसी की मानें तो भैया लोगों ने लिस्ट दे दी है। घोषणा की औपचारिकता ऊपर से हाेनी है। ये भी गजब का संगठन सृजन है। सृजन के नाम पर दिग्गजों ने आपस में रेवड़ी बांट ली।

अटकलबाजी


स्काउट गाइड अध्यक्ष की कुर्सी के बहाने सांसद ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उनके निशाने पर कौन है। मंत्री तो बहाना है। निशाने पर कौन-कौन हैं।

सकरी का मेगा शो कैंसिल होने के बाद अब भाजपा में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है। तीर किसका और कमान किसने संभाल रखी है। निशाने पर कौन और किसे किनारे लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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