विविधता में एकता, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव से मजबूत होगा राष्ट्र; 31 अक्टूबर को मनाया जाएगा राष्ट्रीय एकता दिवस
(धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क एवं अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
CBN36 रायपुर। भारत की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करने के लिए हर वर्ष 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस देशवासियों को राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, आपसी विश्वास और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। सरदार पटेल ने स्वतंत्रता के बाद देशी रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर एक मजबूत और अखंड भारत की नींव रखने में अहम योगदान दिया।
भारत विभिन्न भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है। इतनी विविधताओं के बावजूद देशवासियों को एक सूत्र में बांधे रखने वाली राष्ट्रीय एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। राष्ट्रीय एकता का अर्थ केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, सम्मान और देश के साझा भविष्य में भागीदारी सुनिश्चित करना भी है।
सरदार पटेल ने देशी रियासतों के एकीकरण में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
वर्ष 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के सामने देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने की बड़ी चुनौती थी। तत्कालीन उपप्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, कूटनीति और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से इस चुनौती का सामना किया। उनके प्रयासों से अधिकांश देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण संभव हुआ और आधुनिक भारत के राजनीतिक एकीकरण को मजबूती मिली।
सरदार पटेल के योगदान को सम्मान देने और नागरिकों में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
विकास के साथ समान अवसर भी जरूरी
वर्तमान समय में राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने के लिए देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इससे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के अवसर बढ़ते हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचता है और नागरिकों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तब शासन-व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत होता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बनता है।
सहकारी संघवाद और संवाद से मजबूत होगा भारत
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय राष्ट्रीय विकास के लिए आवश्यक है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, बुनियादी सुविधाओं और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर साझा प्रयासों से विकास को गति मिलती है।
लोकतंत्र में विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में भिन्नता स्वाभाविक है। इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाना चाहिए। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने से दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक भी देश की विकास यात्रा से जुड़ाव महसूस करते हैं।
विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत
भारत की राष्ट्रीय एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी नागरिक एक ही भाषा बोलें, समान परंपराओं का पालन करें या एक जैसे विचार रखें। देश की वास्तविक ताकत विभिन्न भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और जीवनशैलियों के बीच आपसी सम्मान और सहयोग की भावना में निहित है।
डिजिटल संचार के दौर में सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, सूचनाओं की सत्यता की जांच करना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना बेहद जरूरी है। जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव से दूर रहकर भाईचारे, समानता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी आयोजनों और नारों से मजबूत नहीं होती, बल्कि नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान से इसे स्थायी आधार मिलता है।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ से बढ़ेगी आपसी समझ
देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और विभिन्न राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक गतिविधियों और विभिन्न राज्यों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाता है।
ऐसे आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने में सहायक हैं। युवा शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता के माध्यम से समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देना एक मजबूत और समावेशी भारत के निर्माण के लिए जरूरी है।
राष्ट्रीय एकता प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी
राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। देश की सुरक्षा के साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास भी स्थायी शांति एवं प्रगति के लिए आवश्यक हैं।
सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाए।
राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद साझा भविष्य के निर्माण के लिए एकजुट रहना है। सरदार पटेल के आदर्शों से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।
प्रधान संपादक