ये कैसा उल्टा मार्च, हवाई सेवा ही बंद हो गई
बिलासपुरवासियों ने दो दिन पहले बिलासा एयरपोर्ट से हवाई सुविधा में विस्तार की मांग को लेकर उल्टा मार्च किया था। राघवेंद राव सभा भवन से कलेक्टोरेट तक शहरवासी हाथ में तख्ती लिए हवाई उड़ान और एयरपोर्ट विस्तार की मांग करते हुए मार्च किया था। लोगों की भारी भीड़ भी जुटी थी। मार्च के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि दबाव बनेगा और न्यायधानी में उठी आवाज जरुरी रायपुर तक प्रभावी ढंग से पहुंचकर रहेगी। पर यह क्या। आवाज पहुंची तो जरुरी, रिएक्शन उस अंदाज में नहीं आया। साइड इफैक्ट ये कि बिलासपुर से कोलकाता उड़ान को बंद करने सरकार फरमान जारी हो गया है। अब से क्या कहेंगे?
काला टीका की जरुरत
बिलासपुर एयरपोर्ट और बिलासा की इस नगरी को काला टीका की जरुरत आन पड़ी है। पता नहीं एयरपोर्ट को किसकी नजर लग गई। उड़ाने तो बंद हो रही है, एयरपोर्ट का कामकाज भी पूरी तरह ठप पड़ गया है। अब तो आंदोलन करने वाले पदाधिकारी और शामिल होने शहरवासी भी सोचने पर मजबूर हो रहे हैं, कुछ तो बात है, पता नहीं किसकी नजर लग गई। या फिर किसने ऐसी नजर लगा दी कि, सबकुछ उलटा ही हो रहा है। आंदोलन का इम्पैक्ट आने के बजाय साइड इफैक्ट आ रहा है। अब तो लोग कहने भी लगे हैं, एयरपोर्ट और न्यायधानी को काला टीका लगाने की जरुरत है।
पटवारी और घूसखोरी
सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक वीडियो एक बार फिर से वायरल हो रहा है, वायरल हो रहे वीडियो में पटवारी और एक व्यक्ति खड़े हैं, दोनों बीच बातचीत होती है फिर सामने वाला व्यक्ति जेब में हाथ डालता है और नोटों की एक मोटी गड्डी पटवारी के हवाले कर देता है, सीधी सी बात है जितनी मोटी गड्डी उतना ही बड़ा काम, पटवारी नोटों की गड्डी हाथ में रखे-रखे और डिमांड करते सुनाई देते हैं। दोनों तरफ से ओके होने के बाद काम का आश्वासन मिल जाता है। रिश्वत देने वाले व्यक्ति का काम हुआ या नहीं ये तो नहीं पता पर पटवारी का काम लग गया है। कलेक्टर ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए निलंबित कर दिया है। देखने वाली बात ये है कि निलंबन और बहाली के बीच कहीं लेनदेन तो नहीं होता है।
अर्नब ने मचा दी तबाही, चारो तरफ मचा हाहाकार
ये मौसम तो बारिश से भी भयावह है, अर्नबे चक्रवात ने तबाही मचा दी है। चारो तरफ हाहाकर मच गया है। समुद्री तूफान ने गजब ढा दिया है। ऐसा मौसम तो पूरे बारिश के दौरान दिखाई नहीं दिया। दो दिन से झड़ी है, लोग घरों में दुबके पड़े हैं। गांव का नजारा तो और भी भयावह है। अन्नदाता किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही है। फसल नुकसान हो रहा है। साल भर की खून पसीने की कमाई का नुकसान होना तकलीफ देह है। अन्नदाताओं की नजरें अब सरकार की ओर जो टिकी है। सरकारी राहत की उम्मीद में नजरें लगी हुई है।
अटकलबाजी
उल्टा मार्च का साइड रिएक्शन सरकार की तरफ से क्यों आया? किस किरदार को लेकर नाखुशी दिखाई दे रही है।
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प्रधान संपादक