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October 29, 2026 6:40 pm

शेयर ट्रेडिंग के नाम पर डॉक्टर से 34.17 लाख की ठगी, इंदौर से पांच आरोपी गिरफ्तार

“इंदौर के कॉल सेंटर से संचालित नेटवर्क का खुलासा, तीन युवतियां भी शामिल; म्यूल बैंक खातों और 150 सिम कार्ड के इस्तेमाल की आशंका,एसएसपी शशि मोहन सिंह ने निवेश के नाम पर होने वाली ठगी से किया सावधान”

Cbn36 रायगढ़, 29 अक्टूबर। शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर रायगढ़ के एक डॉक्टर से 34.17 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले में पुलिस ने इंदौर से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में तीन युवतियां और दो युवक शामिल हैं। पुलिस की जांच में इंदौर के एक कॉल सेंटर से जुड़े साइबर नेटवर्क, म्यूल बैंक खातों और सिम कार्ड के जरिए ठगी की रकम के लेनदेन के तथ्य सामने आए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी से साइबर थाना रायगढ़ में दर्ज दो मामलों का खुलासा हुआ है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और पुष्पेंद्र बघेल के मार्गदर्शन में साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने मध्यप्रदेश के इंदौर में कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए बैंक खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच में साइबर ठगी के लिए 140 से 150 सिम कार्ड उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर फंसाया

पुलिस के अनुसार, रायगढ़ के सोनकरपारा निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने 27 मई 2026 को साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में मोबाइल फोन के माध्यम से उनका संपर्क सुनील नामक व्यक्ति से हुआ था। उसने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर भारी मुनाफे का लालच देकर स्पार्टन ट्रेड कंपनी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया।

आरोपियों ने व्हाट्सऐप के माध्यम से कंपनी का पोर्टफोलियो भेजा। इसमें निवेश पर अच्छा लाभ होता दिखाई देने से डॉक्टर को भरोसा हो गया। इसके बाद अलग-अलग व्यक्तियों ने उनसे संपर्क कर विभिन्न किस्तों में रकम निवेश कराई। पुलिस के मुताबिक, 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर से कुल 34,17,531 रुपये निवेश कराए गए।

पोर्टफोलियो में लगातार बढ़ता मुनाफा दिखाया जाता रहा, लेकिन जब डॉक्टर ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो वे ऐसा नहीं कर सके। इसके बाद भी उनसे अतिरिक्त निवेश करने के लिए कहा गया। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इस पर अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

बैंक खाते में ठगी की रकम, कमीशन मिलने का खुलासा

दूसरा मामला सूरज शर्मा निवासी हिल व्यू कॉलोनी, रायगढ़ की शिकायत से जुड़ा है। उसने 27 सितंबर 2026 को साइबर थाना में आवेदन देकर बताया कि उसके पंजाब नेशनल बैंक खाते में 12 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच 18 बार में कुल 2,97,298 रुपये का लेनदेन हुआ था। महाराष्ट्र, कर्नाटक और पंजाब में शिकायतें सामने आने के बाद उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया था।

सूरज ने खाते के कथित दुरुपयोग और उस पर लगी रोक हटाने के लिए जांच की मांग की थी। हालांकि, पुलिस की जांच में खाते का साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल किए जाने की आशंका सामने आई। बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में इंदौर की गायत्री विश्वकर्मा के माध्यम से सूरज को नकद और यूपीआई के जरिए कमीशन मिलने के तथ्य मिले।

पुलिस के अनुसार, बैंक खाते का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में कर आर्थिक लाभ अर्जित करने की भूमिका सामने आने पर 30 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 13/2026 के तहत सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

मोबाइल नंबरों की जांच से इंदौर तक पहुंची पुलिस

दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस को एक कॉमन मोबाइल नंबर के संबंध में जानकारी मिली, जिसका इस्तेमाल इंदौर की तनिषा पाटिल द्वारा किए जाने का संदेह था। सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के बीच संपर्क के तथ्य भी सामने आए। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों में मिलने के बाद पुलिस की विशेष टीम को वहां भेजा गया।

पुलिस टीम ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित एक कॉल सेंटर में दबिश देकर गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल को पकड़ा। इसके बाद विजय नगर क्षेत्र से ज्योति मालवीय को हिरासत में लिया गया। ज्योति से मिली जानकारी के आधार पर परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया गया। वहीं, इंदौर से खरसिया आकर अपने रिश्तेदार के यहां रह रहे सूरज शर्मा को भी पुलिस ने पकड़ लिया।

सभी आरोपियों को इंदौर में न्यायालय के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रायगढ़ लाया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन जब्त किए हैं। बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

दो मामलों में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका

एएसपी अनिल सोनी के मुताबिक, अपराध क्रमांक 06/2026 में तरुण नागर, ज्योति मालवीय और तनिषा पाटिल की भूमिका सामने आई है। वहीं, अपराध क्रमांक 13/2026 में सूरज शर्मा, गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल की भूमिका की जांच की गई है। इस तरह दोनों मामलों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों में भी जुड़े हो सकते हैं। साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और सिम कार्ड की जांच के साथ अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एसएसपी ने निवेश के नाम पर होने वाली ठगी से किया सावधान

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि शेयर ट्रेडिंग में अत्यधिक मुनाफे का लालच देने वाले अनजान व्यक्तियों और कंपनियों के झांसे में आकर निवेश न करें। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या पहचान संबंधी दस्तावेज इस्तेमाल करने के लिए देना जोखिम भरा हो सकता है। साइबर अपराधों में संलिप्त लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।

गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने ज्योति मालवीय (20), तनिषा पाटिल (21), तरुण नागर (23), गायत्री कुमारी विश्वकर्मा (21) और सूरज शर्मा (21) को गिरफ्तार किया है। इनमें ज्योति, तनिषा और तरुण मध्यप्रदेश से संबंधित हैं, जबकि गायत्री और सूरज रायगढ़ जिले के निवासी हैं।

इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, एएसआई नंद कुमार सारथी सहित आरक्षक महेश पंडा, पुष्पेंद्र जाटवर, प्रशांत पंडा, जितेंद्र कुर्रे, रविंद्र गुप्ता, धर्मेंद्र सिंह, विकास प्रधान तथा महिला आरक्षक लता नारंगे और यशोमति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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