“आपात स्थिति का हवाला देकर पैसे ऐंठ रहे साइबर ठग, बलौदाबाजार पुलिस कर रही लोगों को जागरूक-अपनों की आवाज सुनकर भावुक होने से पहले सच्चाई की पुष्टि करें। सतर्क रहें, सत्यापन करें और साइबर ठगी से बचें”
CBN36 बलौदाबाजार। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधियों ने ठगी के तरीके भी बदल दिए हैं। अब किसी परिचित की आवाज की नकल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाने की आशंका बढ़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक तकनीक के जरिए ठग रिश्तेदारों या परिचितों की आवाज अथवा वीडियो की नकल कर आपात स्थिति का हवाला देते हैं और तत्काल पैसों की मांग करते हैं। ऐसे मामलों में भावनात्मक दबाव और जल्दबाजी लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।
साइबर अपराध के इस बदलते स्वरूप को लेकर बलौदाबाजार पुलिस लोगों को जागरूक कर रही है। पुलिस ने अपील की है कि किसी परिचित की आवाज सुनकर ही उस पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना, बीमारी या किसी अन्य मुसीबत का हवाला देकर तत्काल पैसे मांगता है, तो रकम भेजने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि जरूर करें।
आवाज पर नहीं, सत्यापन पर करें भरोसा
वॉयस क्लोनिंग तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज जैसी सुनाई देने वाली कृत्रिम आवाज तैयार की जा सकती है। इसी तरह डीपफेक के जरिए नकली वीडियो भी बनाया जा सकता है। साइबर ठग इन तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करने और भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
ऐसे में फोन पर परिचित की आवाज सुनकर घबराने या जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय संबंधित व्यक्ति से उसके दूसरे, पहले से ज्ञात मोबाइल नंबर पर संपर्क करना चाहिए। संभव हो तो परिवार के अन्य सदस्यों से भी जानकारी की पुष्टि करें। केवल आवाज या वीडियो को पहचान का पुख्ता प्रमाण न मानें।
सतर्कता से बच सकती है मेहनत की कमाई
पुलिस की अपील है कि किसी भी आपात कॉल पर बिना पुष्टि के पैसे न भेजें। अनजान व्यक्ति के साथ बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी, ओटीपी या पिन साझा न करें। यदि कॉल संदिग्ध लगे, तो उसकी जानकारी पुलिस को दें।
साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही संबंधित बैंक को सूचना देकर कॉल, संदेश और भुगतान से जुड़े साक्ष्य सुरक्षित रखें।
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