पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में समान अधिकार, तलाक की प्रक्रिया सरल बनाने तथा दहेज के नियम एक समान करने पर दिया जोर
CBN36 रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर महिलाओं ने अपनी राय रखते हुए कानून में समानता, न्याय और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। रायपुर जिले के धरसींवा और गरियाबंद जिले से पहुंचीं विभिन्न महिला स्व-सहायता समूहों की पदाधिकारियों ने रायपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में समिति के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम.के. राऊत तथा वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार ने महिलाओं के सुझावों को गंभीरता से सुना और उन्हें रिपोर्ट में शामिल करने के लिए विचार करने का आश्वासन दिया।
लिव-इन संबंधों का पंजीयन अनिवार्य करने का सुझाव
संवाद के दौरान श्रीमती सीता साहू, श्रीमती बुद्धि साहू, श्रीमती टेमेश्वरी साहू, श्रीमती रेखा साहू और श्रीमती राजेश्वरी बाई सहित अन्य महिला पदाधिकारियों ने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे महिलाओं के शोषण को रोकने में मदद मिल सकती है। साथ ही, ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों के पालन-पोषण और उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
वहीं, श्रीमती लक्ष्मी साहू, श्रीमती सुरेखा रात्रे, श्रीमती दिलेश्वरी मिर्जा, श्रीमती कुमुदिनी चंद्रवंशी और श्रीमती ममता साहू ने स्वतंत्रता, समानता और न्याय को सर्वोपरि बताते हुए धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों में समानता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पैतृक एवं व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने तथा तलाक की प्रक्रिया को आपसी सहमति के आधार पर सरल बनाने का सुझाव दिया।
दहेज के नियमों में एकरूपता की मांग
समाज में व्याप्त विसंगतियों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए श्रीमती ममता यादव, श्रीमती डामीन विश्वकर्मा, श्रीमती विजयलक्ष्मी वैष्णव, श्रीमती ज्योति जोशी और श्रीमती पूर्णिमा बाई ने दहेज एवं विवाह में दिए जाने वाले उपहारों से संबंधित नियमों में एकरूपता लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए स्पष्ट एवं समान प्रावधान होने चाहिए।
जनजातीय परंपराओं और संस्कृति के सम्मान पर जोर
छत्तीसगढ़ की जनजातीय विविधता को ध्यान में रखते हुए चर्चा में स्थानीय समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टताओं का सम्मान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के हितों को सामने रखते हुए श्रीमती माधुरी निषाद, श्रीमती मिनी मार्कंडे, श्रीमती त्रिवेणी निषाद, श्रीमती यामिनी निर्मलकर और श्रीमती रेणुका निषाद ने कहा कि समान नागरिक संहिता से संबंधित प्रावधानों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए ग्रामीण महिलाओं को कानून की जानकारी देना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है।
महिला जागरूकता को बताया जरूरी
कार्यक्रम के अंत में श्रीमती संध्या वर्मा, श्रीमती चंद्रकली, श्रीमती द्रोपदी बाई और श्रीमती भुनेश्वरी साहू ने कहा कि समान कानून की दिशा में आगे बढ़ते हुए सभी समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
समिति के सदस्यों ने महिलाओं की सहभागिता और उनके व्यावहारिक सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्राप्त सुझावों पर विचार कर उन्हें रिपोर्ट में उचित स्थान देने का प्रयास किया जाएगा। संवाद के माध्यम से महिलाओं ने समानता, सुरक्षा, संपत्ति में अधिकार और न्यायपूर्ण कानूनी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा।
प्रधान संपादक