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August 19, 2026 8:41 pm

छत्तीसगढ़ में खनिज खोज को नई रफ्तार, 45 अन्वेषण परियोजनाओं पर लगी मुहर

35 क्रिटिकल-स्ट्रेटेजिक, चार डीप-सीटेड और छह बल्क मिनरल परियोजनाएं शामिल; लिथियम, ग्रेफाइट, REE और रेयर मेटल्स पर खास फोकस

CBN36 रायपुर, 19 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों की खोज और रणनीतिक खनिजों के दोहन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी रायपुर स्थित पुराने सर्किट हाउस में बुधवार को राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक हुई। खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अन्वेषण कार्यों की समीक्षा की गई और वर्ष 2026-27 के लिए खनिज खोज की प्राथमिकताओं और कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।

बैठक में राज्य के 45 नई और जारी अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया। इनमें 35 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक खनिज ब्लॉक, चार डीप-सीटेड खनिज ब्लॉक और छह बल्क मिनरल परियोजनाएं शामिल हैं। इससे राज्य में खासकर भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माने जाने वाले रणनीतिक और दुर्लभ खनिजों की खोज को गति मिलने की उम्मीद है।

GSI संभालेगा 25 परियोजनाओं की कमान

अन्वेषण कार्यक्रम में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की अहम भूमिका रहेगी। तय की गई 45 परियोजनाओं में से 25 अन्वेषण परियोजनाओं का संचालन GSI की रायपुर इकाई द्वारा किया जाएगा। वहीं संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में 11 अन्वेषण प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है।

इन 11 प्रस्तावों में एक ग्रेफाइट, दो चूना पत्थर, चार लौह अयस्क, दो ग्लॉकोनाइट, एक आरईई एवं रेयर मेटल्स तथा एक बॉक्साइट एवं एल्युमिनस लेटराइट युक्त महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉक शामिल हैं।

एक साल में 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर, 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधन स्थापित

बैठक में पिछले वित्तीय वर्ष की उपलब्धियों को भी सामने रखा गया। विशेष सचिव एवं संचालक, भौमिकी-खनिकर्म रजत बंसल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान संचालनालय की ओर से 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर संसाधन और 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधन स्थापित किए गए।

वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 की चार अन्वेषण परियोजनाएं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी जारी रहेंगी। इसके अलावा स्वीकृत एनपीईए की नौ अन्वेषण परियोजनाओं को भी चालू वर्ष में आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इससे राज्य में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिजों के अन्वेषण को लगातार गति मिलेगी और खनिज संसाधन आधार मजबूत होगा।

खनन से राज्य को मिला 16,738 करोड़ रुपये का राजस्व

बैठक में राज्य के खनन क्षेत्र से होने वाली आय का आंकड़ा भी सामने आया। सचिव पी. दयानंद ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को खनन रॉयल्टी एवं अन्य राजस्व से करीब 16,738 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिजों की खोज को लगातार आगे बढ़ाने से राज्य के खनिज संसाधनों का बेहतर आकलन होगा और भविष्य में खनिज आधारित उद्योगों के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सकेगा।

लिथियम से लेकर रेयर मेटल्स तक पर नजर

वर्ष 2026-27 के अन्वेषण कार्यक्रम में उन खनिजों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें देश की रणनीतिक और औद्योगिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित परियोजनाओं में लिथियम, ग्रेफाइट, टिन-टैंटलम-नियोबियम, आरईई (Rare Earth Elements), रेयर मेटल्स, ग्लॉकोनाइट और बॉक्साइट जैसे खनिज शामिल हैं।

बैठक में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में खनिज अन्वेषण तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही जमीन की अधिक गहराई में मौजूद डीप-सीटेड खनिजों का सटीक आकलन करने के लिए आधुनिक और उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल की जरूरत बताई गई।

पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र सौंपे

बैठक के दौरान भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने छत्तीसगढ़ के पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे। इन मानचित्रों से संबंधित क्षेत्रों में खनिज संभावनाओं की पहचान और आगे के अन्वेषण कार्यों को दिशा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बैठक में खनिज खोज की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। खनिज आधारित उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए मजबूत और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने पर भी चर्चा हुई।

केंद्र-राज्य की एजेंसियों से लेकर बड़े उद्योगों तक की भागीदारी

SGPB की बैठक में खनिज और भूवैज्ञानिक क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख केंद्रीय, राज्य स्तरीय संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), भारतीय खान ब्यूरो, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, केंद्रीय भूजल बोर्ड, CMPDIL, MOIL, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रतिनिधि शामिल रहे।

इसके अलावा CGCOST, अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों और उद्योग जगत की भी बैठक में भागीदारी रही। उद्योगों की ओर से जिंदल स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड और माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मौजूद रहे। डीजीएम की एमसीटीए टीम ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

अन्वेषण से उद्योग तक मजबूत आधार तैयार करने की कवायद

SGPB की 26वीं बैठक में लिए गए फैसलों से साफ है कि छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक खनिजों के साथ-साथ क्रिटिकल, स्ट्रेटेजिक, दुर्लभ और गहराई में मौजूद खनिजों की खोज पर भी जोर बढ़ा रहा है। 45 परियोजनाओं को अंतिम रूप दिए जाने, GSI समेत विभिन्न एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने और आधुनिक तकनीक पर जोर से राज्य में खनिज अन्वेषण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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