CBN36 वर्धा, 19 अगस्त 2026। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। हिंदी साहित्य विभाग द्वारा महादेवी वर्मा सभागार में ‘तुलसीदास का सामाजिक-सांस्कृतिक बोध’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इससे पूर्व कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने तुलसी भवन स्थित गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें अभिवादन किया।
मुख्य वक्ता सुरेंद्रनाथ सांध्य कॉलेज, कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के डॉ. प्रेम शंकर त्रिपाठी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास का साहित्य, विशेषकर रामचरित मानस, लोकजीवन की आचार संहिता है। तुलसीदास विनम्र एवं स्वाभिमानी कवि थे और उनका साहित्य सामाजिक सुधार का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि तुलसीदास ‘विवेक’ को विशेष महत्व देते हैं और अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चेतना जागृत करते हैं।

डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि तुलसीदास का साहित्य सभी को सुकून देने वाला है। राम उनके आराध्य हैं और रामचरित मानस में नीति एवं ज्ञान के माध्यम से वे विचलित समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य उन्नति के दौर में आगे बढ़ रहा है, लेकिन संस्कृति के स्तर पर पिछड़ रहा है। ऐसे समय में तुलसीदास का साहित्य समाज के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है।
कार्यक्रम के प्रास्ताविक वक्तव्य में भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने कहा कि तुलसीदास के विचार आदर्श समाज की रचना के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने लोक को संस्कृति से जोड़ने के लिए अवधी भाषा में रामचरित मानस की रचना की, जिसके माध्यम से भारतीय आत्मा को समझा जा सकता है।
साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि तुलसीदास अपनी रचनाओं में निर्मलता और विवेक की बात बार-बार करते हैं। वे लोक और शास्त्र दोनों के निपुण कवि थे। उनके आराध्य पुरुषोत्तम श्रीराम शक्ति, शील और सौंदर्य से संपन्न हैं।

कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य हिंदी साहित्य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने दिया। संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी ने किया तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गोस्वामी तुलसीदास एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत से हुआ।
इस अवसर पर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जयंत उपाध्याय, सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेश मरर्जी कदम, डॉ. जगदीश नारायण तिवारी, सूर्य प्रकाश पाण्डेय, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, डॉ. प्रदीप, बी.एस. मिरगे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्रधान संपादक




