
CBN 36 रायपुर। छत्तीसगढ़ जल्द ही अपनी पहली राजकीय तितली चुनने जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने अनूठी पहल करते हुए आम जनता से मतदान के माध्यम से अपनी पसंद की तितली चुनने की अपील की है। इस पहल का उद्देश्य केवल राजकीय प्रतीक का चयन करना नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ाना भी है।

राजकीय तितली की दौड़ में कॉमन बैंडेड पीकॉक, ऑरेंज ओकलीफ और स्पॉट स्वॉर्डटेल प्रमुख दावेदार हैं। इनमें से जिस तितली को सबसे अधिक जनसमर्थन मिलेगा, उसे प्रदेश की पहली राजकीय तितली घोषित किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार तितलियां पर्यावरण की सेहत का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती हैं। इन्हें जैव संकेतक (बायो-इंडिकेटर) कहा जाता है, क्योंकि इनकी मौजूदगी वन, जलवायु, जल स्रोतों और वनस्पतियों की गुणवत्ता का संकेत देती है। तितलियों की संख्या में वृद्धि या कमी पर्यावरणीय बदलावों का भी संकेत होती है।

छत्तीसगढ़ का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा वनाच्छादित है। कांकेर, अचानकमार, इंद्रावती, उदंती-सीतानदी सहित प्रदेश के कई संरक्षित वन क्षेत्रों में तितलियों की अनेक दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे में राजकीय तितली का चयन प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता को नई पहचान देने के साथ संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती देगा।

दावेदार प्रजातियों में कॉमन बैंडेड पीकॉक अपने चमकीले हरे-काले पंखों के कारण स्वस्थ वनों का प्रतीक मानी जाती है। ऑरेंज ओकलीफ पंख बंद करने पर सूखे पत्ते जैसी दिखाई देती है, जिससे वह आसानी से शिकारियों से बच निकलती है। वहीं स्पॉट स्वॉर्डटेल अपनी लंबी तलवारनुमा पूंछ और तेज उड़ान के लिए जानी जाती है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी तथा जैव विविधता के संरक्षण में जनभागीदारी को नया आयाम मिलेगा।
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