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September 11, 2026 11:28 pm

हाईकोर्ट की रोक के बीच निलंबन पड़ा भारी, तहसीलदार को मिली राहत

पूर्व में विभागीय जांच पर रोक के बावजूद उन्हीं आरोपों में किया गया था निलंबित, शासन समेत सात पक्षकारों को नोटिस

CBN36 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांकेर में तहसीलदार के पद पर पदस्थ माया अंचल लहरे के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने प्रथमदृष्टया इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें निलंबित किया गया, उन्हीं तथ्यों को लेकर राजस्व मंडल बिलासपुर के विभागीय जांच शुरू करने संबंधी आदेश पर हाईकोर्ट पहले ही अंतरिम रोक लगा चुका है। मामले में न्यायालय ने राज्य शासन सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मामला रायगढ़ जिले के पुसौर तहसील में माया अंचल लहरे के तहसीलदार के रूप में पदस्थ रहने के दौरान पारित राजस्व आदेश से जुड़ा है। 28 अक्टूबर 2020 को उन्होंने ग्राम पुसौर स्थित खसरा नंबर 16/2ख की शासकीय भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में ‘शासकीय छोटे झाड़ के जंगल’ मद में दर्ज थी, के राजस्व अभिलेखों में सुधार करते हुए आनंद राम का नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया था।

इस आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल बिलासपुर के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत किया गया। राजस्व मंडल के अध्यक्ष ने 21 अगस्त 2025 को मामले की सुनवाई के बाद माना कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना शासकीय मद में दर्ज भूमि का मद परिवर्तन किया गया। इसके बाद संबंधित तहसीलदार और हल्का पटवारी के विरुद्ध प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को आदेश की प्रति के साथ पत्र भेजा गया।

राजस्व मंडल के आदेश पर हाईकोर्ट ने पहले ही लगाई थी रोक

राजस्व मंडल के इस आदेश को माया अंचल लहरे ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। WPS No. 1785/2026 में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को अंतरिम आदेश जारी कर राजस्व मंडल के 21 अगस्त 2025 के उस हिस्से पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया था। यह अंतरिम आदेश अब भी प्रभावी है और मूल याचिका न्यायालय में लंबित है।

इसी दौरान छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अवर सचिव ने 16 जुलाई 2026 को माया अंचल लहरे को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उस समय वह कांकेर जिले में तहसीलदार के पद पर पदस्थ थीं।

‘पूर्व आदेश के विपरीत है निलंबन’

निलंबन आदेश को चुनौती देते हुए माया अंचल लहरे ने अधिवक्ता नरेंद्र मेहर के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 10 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता अपूर्वा पांडे ने पक्ष रखा।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि निलंबन उन्हीं आरोपों और तथ्यों के आधार पर किया गया है, जिनके संबंध में राजस्व मंडल ने विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। जबकि हाईकोर्ट 17 फरवरी 2026 के अंतरिम आदेश के जरिए उक्त विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश पर पहले ही रोक लगा चुका है।

दलील दी गई कि हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावी रहते हुए 16 जुलाई 2026 को उन्हीं आरोपों के आधार पर निलंबन आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ता ने इसे न्यायालय के पूर्व अंतरिम आदेश के विपरीत बताते हुए राहत की मांग की।

सात पक्षकारों को नोटिस

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तहसीलदार माया अंचल लहरे के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, अवर सचिव, राजस्व मंडल बिलासपुर, आयुक्त बिलासपुर संभाग, कलेक्टर रायगढ़, कलेक्टर कांकेर और संबंधित अनुविभागीय अधिकारी समेत उत्तरवादीगण को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले में आगे की सुनवाई शासन के जवाब के बाद होगी।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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