छत्तीसगढ़ ,रायपुर ।राजधानी रायपुर को लेकर यह सवाल अब टाला नहीं जा सकता क्या नशे का कारोबार यहां महज अपराध है या फिर एक संरक्षित व्यवस्था? सिपाही हिमांशु बर्मन की गिरफ्तारी ने उस सच्चाई की ओर इशारा किया है, जिसे अब तक अनदेखा किया जाता रहा।
जब पुलिस का एक सिपाही दिल्ली पंजाब से ड्रग्स मंगवाकर राजधानी में सप्लाई करता पाया जाता है, तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं रह जाता। यह पूरे तंत्र की विफलता का प्रमाण बन जाता है। सवाल यह नहीं है कि हिमांशु बर्मन पकड़ा गया, असली सवाल यह है कि वह इतने समय तक कैसे नहीं पकड़ा गया।
राजधानी में फैलता नशे का जाल
रायपुर में आए दिन ड्रग्स पकड़ने की खबरें आती हैं। युवाओं की पार्टियों में नशे के इस्तेमाल की चर्चाएं अब अपवाद नहीं रहीं। इसके बावजूद अगर वर्दी में बैठा एक व्यक्ति नशे के कारोबार को बढ़ाता रहा, तो यह मानने में संकोच नहीं होना चाहिए कि इस काले धंधे को कहीं न कहीं मौन संरक्षण मिला हुआ था।
संरक्षण के बिना नहीं पनपता संगठित अपराध
इतिहास गवाह है कोई भी संगठित अपराध अकेले नहीं चलता। उसके पीछे या तो राजनीतिक चुप्पी होती है या प्रशासनिक शिथिलता। हिमांशु बर्मन की गिरफ्तारी ने उस दरवाज़े को थोड़ा सा खोला है, जिसके पीछे कई चेहरे छिपे हो सकते हैं। अब असली परीक्षा यह है कि जांच वहां तक पहुंचेगी या फिर हमेशा की तरह जांच जारी है कहकर मामला समय के हवाले कर दिया जाएगा।
नई जिम्मेदारी, नई उम्मीदें

इसी बीच रायपुर के लिए एक नई उम्मीद भी जुड़ी है। आईपीएस डॉ. संजीव शुक्ला के राजधानी पुलिस आयुक्त बनने के बाद से शहरवासियों को उनसे काफी अपेक्षाएं हैं। उनकी स्वच्छ छवि और कार्यशैली हमेशा चर्चा में रही है। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को अब सिर्फ दिखावटी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
कितनी गहराई तक जाएगी जांच
उम्मीदें तभी भरोसे में बदलेंगी, जब ड्रग्स नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए निर्भीक कार्रवाई होती दिखेगी। सवाल यह नहीं है कि एक आरोपी सिपाही पकड़ा गया, सवाल यह है कि उसके जरिए नशा खरीदने वाले कौन थे, सप्लाई चेन कहां तक फैली थी और उसे संरक्षण कौन दे रहा था।
युवा पीढ़ी दांव पर
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस नशे का शिकार वही युवा हो रहे हैं, जिन्हें देश और समाज का भविष्य कहा जाता है। जब नशे से बचाने की जिम्मेदारी जिन पर है, वही उसे परोसने लगें, तो युवा पीढ़ी किस पर भरोसा करे?
नीयत की परीक्षा
रायपुर को नशे की गिरफ्त से मुक्त करना अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासन की नीयत की परीक्षा है। राजधानी की जनता यह देखना चाहती है कि क्या इस बार सच में नशे के कारोबार पर प्रहार होगा, या फिर एक-दो गिरफ्तारियों के बाद सब कुछ फिर उसी अंधेरे में गुम हो जाएगा।
प्रधान संपादक


