बिलासपुर. अवैध उत्खनन के संबंधित मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने लीज एरिया से बाहर हो रहे उत्खनन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। बेंच ने माइनिंग सिकरेट्री को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 26 फरवरी की तिथि तय कर दी है।
आरंग के ग्राम निसदा निवासी ओम प्रकाश सेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। पीआईएल में बताया है, गांव में ब्लैक स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज दी गई थी। लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से करीब पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध कब्जा कर उत्खनन शुरू कर दिया। खनन के दौरान निकलने वाला माइनिंग वेस्ट और पत्थर सीधे महानदी में डंप किए जा रहे हैं। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और आसपास की लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया गया है कि तीन साल पहले पर्यावरणीय अनुमति समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद क्षेत्र में बेखौफ उत्खनन और धड़ल्ले से ब्लास्टिंग की जा रही है।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने डिवीजन बेंच को बताया, कलेक्टर ने अवैध उत्खनन की शिकायत पर खनिज विभाग से जांच कराई थी। जांच में सात लीजधारकों को दोषी पाया गया है। पर्यावरणीय अनुमति खत्म होने के बाद भी उत्खनन करने वाले सात दोषी लीजधारकों पर 30 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का नोटिस जारी किया गया है। राज्य सरकार के जवाब के बाद डिवीजन बेंच ने पूछा,नदी पर माइनिंग वेस्ट डंप करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। डिवीजन बेंच ने माइनिंग सिरकेट्री को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।
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