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October 13, 2026 3:48 am

हाई कोर्ट ने कहा, जल जीवन मिशन का एसएमई पर हो पूरा,तय होगी जिम्मेदारी, जवाबदेही से कोई बच नहीं सकता


बिलासपुर। हाई कोर्ट के स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। पीआईएल की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा ने डिवीजन बेंच को बताया, जल जीवन मिशन के कामकाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से अपने हिस्से की 50 प्रतिशत राशि अभी जारी नहीं हो पाई है। अधिवक्ता मिश्रा के जवाब के बाद बेंच ने प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 30 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।

तय होगी जिम्मेदारी, जवाबदेही से कोई बच नहीं सकता

काम में हो रहे विलंब को लेकर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा, अफसरों की जवाबदेही तय की जाएगी, जिम्मेदारी से कोई बच नहीं सकता। अपनी जिम्मेदारी निभाने से किनारा करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।
पीआईएील की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच के सामने जानकारी आई थी,बिलासपुर जिले में 33 गांव ऐसे हैं जहां केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जिले के कई स्कूलों में भी कमोबेश कुूछ इस तरह की अव्यवस्था है। योजना के संचालन में केंद्र व राज्य सरकार की बराबरी की भागीदारी है।
हाई कोर्ट के स्वत: संज्ञान वाली पीआईएल पर बीते दो साल से सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान एक सच ऐसा भी सामने आया कि जिले के एक गांव दैहानपारा में केवल 130 घरों को पानी की आपूर्ति की जा रही है, जो उस गांव की आबादी का मात्र 20 प्रतिशत है। कोर्ट ने कहा कि जल जीवन मिशन प्रारंभ होने के बाद बिलासपुर सबसे विवादित जिला बना हुआ है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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