बिलासपुर।संकेत साहित्य समिति, बिलासपुर इकाई की ओर से बसंत उत्सव के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन राजकिशोर नगर स्थित साहित्यकार राकेश खरे ‘राकेश’ के निज निवास पर किया गया। गोष्ठी बसंत के उल्लास, काव्यात्मक ओज और सामाजिक विसंगतियों पर केंद्रित रचनाओं के कारण विशेष रूप से प्रभावशाली रही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात गजलकार केवल कृष्ण पाठक ने की। मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए निरंतर संघर्षरत प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संस्थापक संगम त्रिपाठी उपस्थित रहे। वरिष्ठ साहित्यकार विजय तिवारी एवं अमृतलाल पाठक विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे। कार्यक्रम का सफल संचालन हरवंश शुक्ला ने किया।
गोष्ठी की प्रमुख विशेषता साहित्यिक कृति ‘गंगाजली’ का विमोचन रहा, जिसे उपस्थित साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया।
काव्य गोष्ठी में गीतकार विजय तिवारी, गजलकार अमृतलाल पाठक, केवल कृष्ण पाठक, अंजनी कुमार तिवारी ‘सुधाकर’, हरवंश शुक्ला, शिवशरण श्रीवास्तव ‘अमल’, अशरफीलाल सोनी, संगम त्रिपाठी, पूर्णिमा तिवारी, नरेंद्र कुमार शुक्ल ‘अविचल’, राजकुमार द्विवेदी ‘बिंब’, दिनेश्वर राव जाधव, जगतारण डहरे, विनय कुमार पाठक, श्रीमती वंदना खरे, राकेश खरे ‘राकेश’ एवं राजेश सेवतकर सहित अनेक कवियों ने सहभागिता की।
कवियों ने जहां बसंत ऋतु के आगमन को रचनाओं के माध्यम से जीवंत किया, वहीं सामाजिक विसंगतियों पर तीखे हास्य-व्यंग्य के प्रहार भी किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में केवल कृष्ण पाठक ने गोष्ठी को न केवल सफल बल्कि समाज को दर्पण दिखाने वाली बताते हुए इसे सुसंस्कृति, एकता और भाईचारे के बीज बोने वाला प्रेरणादायी आयोजन कहा।
अंत में राकेश खरे ‘राकेश’ ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संकेत साहित्य समिति द्वारा प्रत्येक माह की 20 तारीख को उस माह में जन्मे कवियों का सामूहिक जन्मदिवस मनाने की घोषणा की। कार्यक्रम का समापन मनीषा एवं अर्चना द्वारा स्वल्पाहार एवं चाय के साथ किया गया।उक्त जानकारी राकेश खरे ‘राकेश’अध्यक्ष, संकेत साहित्य समिति ने दी ।
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