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February 10, 2026 3:08 pm

कानाफूसी

हैकर्स और साइबर फ्रॉड की पहुंच कहां तक


आप ये सोच रहे होंगे कि हम आपको हैकर्स और साइबर फ्रॉड का लोकेशन बताने वाले हैं या फिर उनकी पहुंच को लेकर कोई चर्चा करने वाले हैं तो आपका गेसिंग गलत है। हम चर्चा कर रहे हैं हैकर्स जो ना करे कम ही है। अब देखिए ना, सरगुजा कमिश्नर के फेसबुक आईडी को हैक कर लिया। बात यहां तक ठीक है, आईडी हैक करने के बाद आदत के मुताबिक मांगने लगे। रुपयों की डिमांड करने लगे। जिनका आईडी हैक किया है, उनका रुतबा और प्रतिष्ठा का तो ख्याल रखना चाहिए। आखिर हैकर्स अपने औकात पर आ ही गए और मांगने ही लगे। जो लोग साहब के फ्रेंड हैं,उनको अटपटा लगा और कॉल किया। कॉल रिसीव होते ही पहचान वालों ने जो कुछ बताया साहब की चिंता बढ़ गई। अपने वॉल पर लिखकर सूचना दी, हैक हो गया है आईडी, पैसे बिलकुल भी ना दे। वगैरहा,वगैरहा।ये हैकर्स भी ना, देर सबेर अपनी औकात पर आ ही जाते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एक्टिव हैं तो जरा हैकर्स से भी सावधान रहिए। नहीं तो पता नहीं क्या-क्या हो जाता है।

ड्रोन, ड्रग्स और पैडलर्स, एसएसपी का नहले पर दहला


ड्रग्स के धंधे में शामिल अपराधियों और पैडलर्स को उनकी असली जगह दिखाने का काम बिलासपुर की पुलिस बहुत अच्छे से करती नजर आ रही है। नशे के सौदागरों की संपत्ति को फ्रीज कराना और सफेमा कोर्ट की अनुमति के बाद उसे राजसात करने की कार्रवाई की शुरुआत छत्तीसगढ़ में बिलासपुर से ही हुई। लोगों ने मुंबई सफेमा कोर्ट का नाम पहली बार पढ़ा और इस कोर्ट से होने वाले फैसले की जानकारी भी पहली बार मिली। बिलासपुर की पुलिस ने एक कदम आगे की सोचते हुए अब ड्रोन से निगरानी और पैडलर्स से लेकर ड्रग्स के धंधे में शामिल लोगों के गिरेबां पकड़ना शुरू कर दिया है। ड्रोन के जरिए ड्रग्स पैडलर और शामिल लोगों की तलाश की जा रही है। बिलासपुर जिले के एसएसपी के इस नवाचार की चर्चा भी जोरशोर से हो रही है। हो भी कयों ना। नशे के सौदागरों को असली जगह पहुंचाकर युवा पीढ़ी की सुरक्षा की जिम्मेदारी जो निभा रहे हैं।

धंधेबाजों का क्या होगा,ग्रेंस एटीएम आने के बाद तो……


कैश एटीएम के बाद अब ग्रेंस एटीएम नजर आएंगे। बिलासपुर जिले को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। आने वाले महीनो में राशन कार्ड की जरुरत और राशन दुकानों में लाइन लगने का झंझट खत्म हो जाएगा। राशन कार्ड की जगह अब कार्डधारकों के हाथों में ग्रेंस एटीएम होगा। जहां मर्जी, वहां लगे ग्रेंस एटीएम ने राशन निकाल सकेंगे। पीडीएस पूरी तरह हाईटैक सिस्टम से लैस हो जाएगा। सवाल यह उठ रहा है, धंधेबाजों का क्या होगा। राशन दुकान के बहाने चावल हजम करने वालों का क्या होगा। इनकी तो दुकान ही बंद हो जाएगी। वैसे अभी भी राशन दुकान की क्रेज जमकर है। एक दुकान लेने के लिए लोग क्या-क्या हथकंडे नहीं अपनाते हैं। एटीएम खुलते ही इनकी दुकान पर ताला लगना तो तय मानकर चलिए।

कवर्धा के चूहे बिलासपुर तो नहीं आ गए


समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान जो बवाल कवर्धा में मचा,उसने तो सियासत तक में अपनी जगह बना ली। एक्स सीएम ने छत्तीसगढ़ और गुजरात के चूहों की तुलना भी कर दी। कवर्धा में करोड़ों का धान चट करने वाले चूहे कहीं बिलासपुर तो नहीं आ गए, या फिर बिलासपुर की ओर कूच तो नहीं कर गए हैं। जो कुछ सुनने में आ रहा है और सामने नजर आ रहा है,उससे तो यही लग रहा है कि आज नहीं तो कल कवर्धा वाले चूहों का उदाहरण यहां भी देने लगेंगे। यह भी मानकर चलिए कवर्धा की तर्ज पर चूहे यहां भी लाखों के धान खाने वाले हैं। यह तो वक्त बताएगा कि किस चूहे ने लाखों का धान खा लिया और डकार भी नहीं लिया। बहरहाल चर्चा तो शुरू हो ही गई है। चर्चा शुरू होती है तो बात कुछ तो रहती है। बिना धुआं के आग नहीं निकलता, चर्चा है तो चूहे आज नहीं तो कल नजर आ ही जाएंगे।

अटकलबाजी


अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर से लेकर मौजूदा छत्तीसगढ़ में राशन दुकान का अलग क्रेज रहा है। आज भी आपको जिले के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों में नामचीन चेहरे आज भी नजर आ ही जाएंगे। वैसे ही जैसे कैरोसिन का डीलरशीप को लेकर जोर हुआ करता था। कैरोसिन वाले कहां से कहां पहुंच गए सभी जानते हैं। ग्रेंस एटीएम के बाद राशन दुकान वाले कहां जाएंगे।

कवर्धा वाले चूहों का क्रेज कुछ ज्यादा ही नजर आने लगा है। चर्चा हो रही है, आज नहीं तो कल बिलासपुर में भी कवर्धा वाले चूहों की कहानी दोहराई जाएगी। तब कौन-कौन आएंगे घेरे में। जरा नजर दौड़ाइए।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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