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January 25, 2026 6:28 pm

हिंदी विश्वविद्यालय में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

विद्यार्थियों ने पत्थरों पर उकेरी रचनात्मकता की अनूठी मिसाल

वर्धा, 25 जनवरी।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की सृजनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से रविवार को शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास पड़े पत्थरों को एकत्र कर पांच बड़े टीलों का निर्माण किया गया जिन पर विद्यार्थियों ने रंगों के माध्यम से आकर्षक एवं भावपूर्ण चित्र उकेरे।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने महाराष्ट्र की पारंपरिक वारली कला, मधुबनी चित्रकला सहित विविध लोक कलाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। चित्रों के माध्यम से गांधी जी का चरखा, विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न, एनसीसी का लोगो, स्वच्छता अभियान, शिक्षा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति, पर्यावरण संरक्षण तथा वन्य जीव जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।

इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी सृजनात्मक अभिव्यक्ति को पत्थरों पर साकार किया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा के निर्देश पर इस आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई थी। प्रतियोगिता के संयोजक प्रदर्शनकारी कला विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सतीश पावडे तथा सह-संयोजक शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राम अवध रहे।

पूर्वाह्न 10 बजे से प्रारंभ हुई प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतिभागियों ने रंगों के प्रयोग से साधारण पत्थरों को कलात्मक कृतियों में परिवर्तित कर दिया। आयोजन के सफल संचालन में डॉ. विधु खरे दास डॉ. वीरेंद्र प्रताप यादव डॉ. संदीप सपकाले डॉ. चंद्रशेखर पाण्डेय बी. एस. मिरगे एवं संगीता मालवीय सहित अन्य सदस्यों ने सहयोग किया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध चित्रकार आशीष पोहाने संजय तिरले तथा आशीष उजवने शामिल रहे। रंग-बिरंगे चित्रों से विश्वविद्यालय परिसर न केवल आकर्षक बना है, बल्कि उसमें कला और संस्कृति की सजीव झलक भी दिखाई दे रही है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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