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January 25, 2026 6:29 pm

छत्तीसगढ़ी सिनेमा को संस्कृति और रिश्तों से फिर जोड़ने आ रही है मयारू भौजी–2

पारिवारिक फिल्म 15 मई से पूरे छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में होगी प्रदर्शित

छालीवुड के लिए अहम पड़ाव : मनोरंजन नहीं, सामाजिक दायित्व का माध्यम,रिश्तों की कहानी, नए दौर की संवेदनाएँ

छत्तीसगढ़ ।छत्तीसगढ़ी सिनेमा एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक चेतना की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ की लोक कला परंपरा और सामाजिक मूल्यों को दशकों से सहेजते आ रहे सुंदरानी फिल्म्स एक बार फिर पारिवारिक संवेदनाओं से जुड़ी फिल्म मयारू भौजी-2 लेकर आ रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद इस चर्चित शीर्षक की वापसी को छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

मनोरंजन नहीं, सामाजिक दायित्व का माध्यम

छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत के स्तंभ माने जाने वाले मोहन सुंदरानी ने हमेशा सिनेमा को केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज को दिशा देने वाला प्रभावशाली माध्यम माना है। उनके नेतृत्व में बनी फिल्मों ने नशामुक्ति शिक्षा स्वास्थ्य सामाजिक कुरीतियों और पारिवारिक मूल्यों जैसे विषयों को आम जनता के बीच सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।मयारू भौजी–2 उसी वैचारिक परंपरा को आगे बढ़ाती है जहाँ कहानी का केंद्र परिवार, रिश्तों की गरिमा और सामाजिक जिम्मेदारी है।

रिश्तों की कहानी, नए दौर की संवेदनाएँ

तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में पारिवारिक रिश्तों में आ रही दूरी और संवाद की कमी एक गंभीर विषय बनती जा रही है। ‘मयारू भौजी–2’ इन्हीं पहलुओं को संवेदनशीलता के साथ छूती है। फिल्म में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश की गई है, जिससे नई पीढ़ी भी खुद को कहानी से जोड़ सके।यह फिल्म दर्शकों को यह संदेश देती है कि सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर भी समय के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।

नई पीढ़ी की दस्तक

इस फिल्म के माध्यम से सुंदरानी परिवार की नई पीढ़ी के प्रतिभाशाली कलाकार निखिल सुंदरानी छत्तीसगढ़ी सिनेमा में अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर रहे हैं। फिल्मी वातावरण और सांस्कृतिक मूल्यों में पले-बढ़े निखिल से दर्शकों को एक सहज, सशक्त और प्रभावशाली अभिनय की उम्मीद है।फिल्म समीक्षकों और सिनेप्रेमियों का मानना है कि निखिल का आगमन छालीवुड को नई ऊर्जा और एक नया दृष्टिकोण दे सकता है, जो आने वाले समय में उद्योग के लिए सकारात्मक साबित होगा।

अनुभवी टीम की मजबूत पकड़

मयारू भौजी–2 के निर्माता विजय सुंदरानी हैं, जबकि निर्देशन की जिम्मेदारी उत्तम तिवारी ने संभाली है। निर्देशन, संगीत और प्रस्तुति के स्तर पर फिल्म को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंगों के साथ आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

निर्माताओं का दावा है कि फिल्म की कहानी हर वर्ग के दर्शकों से संवाद स्थापित करेगी और सपरिवार देखी जाने वाली सशक्त फिल्म के रूप में सामने आएगी।

छालीवुड के लिए अहम पड़ाव

ऐसे समय में जब स्थानीय सिनेमा को बड़े बजट और बाहरी प्रभावों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है मयारू भौजी–2 जैसी फिल्में छत्तीसगढ़ी सिनेमा की पहचान को मजबूत करती हैं। यह फिल्म स्थानीय भाषा संस्कृति और जीवनशैली को केंद्र में रखकर बनी है, जो क्षेत्रीय सिनेमा की आत्मा को जीवित रखने का काम करती है।

15 मई से सिनेमाघरों में

यह बहुप्रतीक्षित पारिवारिक फिल्म 15 मई से पूरे छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी। निर्माताओं और कलाकारों को उम्मीद है कि दर्शक सपरिवार सिनेमाघरों में पहुँचकर इस फिल्म को समर्थन देंगे और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अपनी भूमिका निभाएँगे।

संस्कृति का उत्सव

मयारू भौजी–2 केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी रिश्तों और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। यह फिल्म उस दौर में पारिवारिक सिनेमा की अहमियत को रेखांकित करती है, जब सामाजिक मूल्यों को सहेजना समाज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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